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छींक आना:- क्या आप भी रोज़ रोज़ छींकने की समस्या से परेशान हैं तो करें ये उपाय

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छींक आना  क्या एक बीमारी है ? Sneeze What is a disease ?

छींक आना लगभग सभी देशों में एक जैसा होता है दरअसल छींक आना हमारे शरीर की एक स्वाभाविक प्रकिया है आपने देखा होगा का सभी मनुष्यों की छिकने की  आवाजें अलगअलग होती हैं और इसे कहते हैंस्नीज आनोमैटोपाइयाजिसका सरल सा मतलब है, “छींकने में हुई कुदरती आवाजजो देश, स्थान और व्यक्ति पर निर्भर कर सकती है। असल में 160 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से आई छींक और कुछ नहीं, नाक में घुसे अवांछित सूक्ष्म कणों को बाहर फेंकने के लिए की गई प्रतिक्रिया है जिस पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं होता। भारत में लोग छींकते हैं तो आवाज निकलती हैआच्छीजबकि अमरीका में कोई छींके तो आवाज आती हैआच्छू

छींक आना से क्या होता है ? What happens once the sneeze?

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यह बाहरी जीवों के संपर्क में आने के पश्चात शरीर द्वारा की जाने वाली प्रतिक्रिया है. सामान्य स्थिति में आप के शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली रोग के कारक विषाणुओं से आप की रक्षा करती है. लेकिन अगर आप को ऐलर्जी है तो आप के शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली नुकसानरहित जीवों को भी चेतावनी के तौर पर लेती है. ऐलर्जी की वजह से जब आप का शरीर उन बाहरी जीवाणुओं को बाहर निकाल फेंकना चाहता है, तो आप को छींक आती है.

एक बार छींक आना मतलब करीब 40 हजार से ज्यादा सूक्ष्म बूंदें या ड्रॉपलेट्स हवा में 160 किलोमीटर से ज्यादा की गति के साथ घुल जाती है। और छींकने की गति 960 किलोमीटर प्रति घंटा तक हो सकती है। साधारणत  सामान्य और रोगमुक्त अवस्था में दिन में तकरीबन 7 बार छींक आती है। लेकिन श्वसन तंत्र के संक्रमण में यह बढ़कर 100 बार से ज्यादा हो सकती है और सावधानी बरतने पर आसपास के लोगों को भी बीमार कर सकती है। 

छींक आना क्या दूसरों को प्रभावित कर सकता है ? Sneeze can affect others ?

यदि कोई व्यक्ति हवा से फैलने वाले संक्रामक रोग से पीडित है और वह बिना कोई एहतियात बरते छींकता है तो आसपास 50 मीटर में सम्पर्क में आने वाले लोगों को प्रभावित कर सकता है। यात्रियों और लोगों से भरी जगहों पर की गई रिसर्च में पता चला है कि छींकने की 161 किमी. प्रति घंटा की तेज गति के कारण 5 सैकंड से भी कम समय में रोगाणु छींकने वाले व्यक्ति से प्रसारित होकर 150 लोगों को प्रभावित या बीमार कर सकते हैं।

छींक आना क्या किसी बीमारी का संकेत है ? What is the sign of a disease sneeze ?

छींक का केंद्र या स्नीज सेंटरदिमाग के निचले हिस्से ब्रेनस्टेम में होता है। इसमें चोट लगने या गड़बड़ होने से छींकने की क्षमता खत्म हो सकती है। अगर आपको धूल, धुएं और ठंड के मौसम में लगातार छींके आती हैं तो ये एलर्जिक राइनाइटिस का संकेत हो सकता है। यह समस्या सुबह के समय ज्यादा होती है। इस समस्या से पीडित लोगों को अपने लाइफस्टाइल में बदलाव कर लेना चाहिए। वे घर में सूखी सफाई करने के बजाय गीला पोछा लगाएं, दीवारों पर फंगस ना जमने दें, सॉफ्ट टॉयज से दूर रहें क्योंकि इनमें डस्टमाइट्स ज्यादा इकटे होते हैं। अपने चादर तकिए आदि को भी साफसुथरा रखें।

छींक आना की समस्या से आराम पाना चाहते हैं तो करें ये उपाय (If the problem to seek relaxation from sneeze These measures)

पेपरमिंट तेल (Peppermint Oil) ;- यदि जुकाम या नाक में किसी परेशानी के वजह से आपको छींक आ रही हैं तो इसके निदान के लिए पेपरमिंट तेल बढ़िया उपाय है। पेपरमिंट तेल में जीवाणुरोधी (Anti-becterial) गुण होते हैं। उपचार के लिए किसी बड़े बर्तन में पानी को उबालकर उसमें पेपरमिंट तेल की 5 बूंदें डालें। एक तौलिये से सिर को ढक कर इस पानी की भाप लें। इस विधि से आपको छींक आने से राहत मिलेगी।

सौंफ की चाय (Fennel Tea) :- सौंफ छींकने से राहत के साथ ही कई सांस संबंधी संक्रमण से लड़ने की क्षमता रखती है। सौंफ में भी कई एंटीबायोटिक (Anti-biotic) और एंटी वायरल (Anti-viral) गुण होते हैं। उपचार के लिए एक कप पानी उबालकर उसमें दो चम्मच सौंफ को कुचलकर डालें। तकरीबन दस मिनट पानी को कवर करके रख दें और उसके बाद छानकर पीएं। इस तरह की चाय को दिन में दो बार पीएं।

काली मिर्च (Black Pepper) :- गुनगुने पानी में आधा चम्मच काली मिर्च डालकर यह मिश्रण दिन में दो से तीन बार पीएं। काली मिर्च का पाउडर डालकर गरारे भी किए जा सकते हैं। इसके अलावा सूप आदि में भी काली मिर्च डालकर पीना, लाभदायक होता है।

अदरक (Ginger) :- अदरक छींकने की समस्या के साथ ही विभिन्न तरह के वायरल और नाक की अन्य समस्याओं के लिए बेहद पुराना और असरदायक उपाय है। एक कप पानी में थोडा़ सा अदरक डालकर उबालें। इसे गुनगुना रहने पर शहद मिलकार पीएं। इसके अलावा कच्चा अदरक या अदरक की चाय भी पी जा सकती है

लहसुन (Garlic) :- लहसुन में एंटीबायोटिक और एंटीवायरल गुण होते हैं, जो कि श्वसन संबंधी संक्रमण (Respiratory Infection) को ठीक करते हैं। यदि सर्दी के आम संक्रमण की वजह से छींके आ रही हैं तो लहसुन आपको बहुत आराम दे सकता है। उपचार के लिए पांच से छह लहसुन की कलियों को पीसकर पेस्ट बनाएं और इसे सूंघें। दाल सब्जी बनाने में भी लहसुन का प्रयोग करें साथ ही सूप बनाने में भी लहसुन की उच्च मात्रा डालें।

अजवायन (Carom Seed Oil) :- अजवायन की पत्ती के तेल में जीवाणओं से लड़ने की तेज क्षमता होती है जो कि एलर्जी को ठीक करने में मदद करती है। उपचार के लिए अजवायन के तेल की दो से तीन बूंद रोजाना इसतेमाल करने से साइनस की समस्या से भी निजात संभव है।

मुद्रा द्वारा भी आप छींक आना की बीमारी से मुक्ति पा सकते हैं उसके लिया आप कीजिये :- अदिती मुद्रा
इस मुद्रा को करने से हर समय उबासी आना, ज्यादा छींक आना जैसे रोगों को दूर किया जा सकता है।

छींक आना

विधि -अंगूठे के आगे के भाग को अनामिका (छोटी उंगली के साथ वाली उंगली) उंगली की जड़ में टेढ़ा लगाने से अदिती मुद्रा बन
जाती है। अदिती मुद्रा को दिन में 3-4 बार 15-15 मिनटों के लिए कर सकते हैं।

नाक की ऐलर्जी को पहचानने का सब से आसान तरीका यह है कि आप यह याद रखें कि ऐसे में अचानक आप की नाक में एक खिंचाव सा अनुभव होने लगता है और बारबार छींक आने लग जाती है. इस का मतलब यह है कि आप का शरीर बाहर से प्रविष्ट किसी चीज या ऐलर्जी के कारक से पीछा छुड़ाना चाह रहा है. कुछ देर बाद आप की नाक बंद होने लग जाती है और संवेदनशील हो जाती है. यह सिलसिला तब तक जारी रहता है, जब तक हमारा शरीर उन तत्त्वों को बाहर निकाल कर नहीं फेंक देता.

छींक आना को रोकने से क्या कोई नुक्सान होता है ? Any damage is to prevent sneeze ?

जी हाँ ये बात बिल्कुल सच है की यदि बार बार आने वाली छीकों को आप रोकते है तो आप को निम्न कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है

कान को होता है सबसे ज्यादा नुकसान :- छींक के आने में करीब-करीब सारा शरीर क्रियारत हो जाता है। जिसमें नाक, कान, आँख, मष्तिष्क, फेफड़े, पेट सब का योगदान होता है।छींक के कारण नाक से 160 किमी./घंटा की गति से हवा निकलती है। अगर आप छींक रोकते हैं तो ये सारा दबाब दूसरे अंगों की ओर मुड़ जाता है। इससे सबसे अधिक नुकसान कान को हो सकता है। कान के पर्दे फटने की सम्भावना रहती है आपके सुनने की क्षमता चली जाए।

छींक रोकने से जो दबाव आता है वह शरीर के अन्य अंगों जैसे कान, ब्रेन, गर्दन, डायफ्राम आदि को अधिक नुकसान पहुंचा सकता है। इसको रोकने से इसमें दवाब पडेगा साथ ही इससे आपके दिमाग को भी नुकसान हो सकता है। छींक रोकने की वजह से आंखों की रक्त वाहिकाएं प्रभावित हो जाती हैं। इसके अलावा गर्दन में भी मोच आ सकती है। कुछ दुर्लभ मामलों में दिल का दौरा आने की भी आशंका रहती ही है।

क्यों जरूरी है छींकना? Why is this important sneezing?

छींक रोकने से स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता है। छींकने के साथ हमारे शरीर में मौजूद खतरनाक बैक्टीरिया बाहर निकल जाते हैं। यदि आप अपनी छींक रोकते हैं तो ये रोगाणु शरीर के अंदर ही रह जाते हैं और बीमारी का कारण बनते हैं। जब भी आपको छींक आए तब आप आपने मुंह में रुमाल रख कर छींक सकते है। इससे किसी दूसरे को भी समस्या नही होगी। और न ही आपको असहज महसूस होगा।

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