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चोकर है स्वास्थ्य के लिये उत्तम आहार व औषधी

चोकर (Screenings)

चोकर :- भारत में अनाज एक प्रमुख आहार है, जिनमें गेहूं की सर्वोच्च भूमिका है। गेहूं का एक बहुत ही महत्वपूर्ण भाग होता है जिसे हम सब चोकर के नाम से जानते हैं | यह गेहूं का बाह्य आवरण होता है जो पिसने के बाद गेहूं की भूसी [ चोकर ] में परिवर्तित हो जाता है | चोकर अपने अन्दर लगभग सभी विटामिन्स एवं मिनरल्स को समेटे होता है , परन्तु अधिकतर लोग आंटे को छानकर बची हुयी चोकर को अनुपयोगी समझकर उसे फेंक देते हैं जबकि प्रति १०० ग्राम चोकर में – १०.०% जल, १४.०%प्रोटीन , ४.४% वसा , ०.८% खनिज लवण , २९.५% कार्बोज होता है गेहूं के बहुआयामी गुणों के कारण यहां के लोग इसे सबसे ज्यादा पसंद करते हैं। इसका इस्तेमाल आटा, दलिया, सूजी, मैदा आदि रूपों में किया जाता है। हमारे अधिकांश भोजन या नाश्ते में गेहूं के आटे का प्रयोग होता है। प्रमुख आहार होने के बावजूद अधिकतर लोग इस अनाज में मौजूद फाइबर (रेशा) से अनजान हैं। साबुत गेहूं में रेशेदार चोकर पाया जाता है, जो पाचनतंत्र के लिए महत्वपूर्ण है।

खाद्यान्नों को पिसवाकर प्रायः उन्हें छाना जाता है। छानने में गेहूँ, ज्वार मक्का आदि अनाज का ऊपरी छिलका छलनी में ही रह जाता है। गृहणियाँ इस छिलके को जिसे बोलचाल भाषा में चोकर कहती हैं, या तो फेंक देती हैं अथवा पशुओं को डाल देती हैं। यदि यह मालूम हो सके कि इस प्रकार अनाज का सबसे अधिक पौष्टिक भाग व्यर्थ चला जाता है, तो बहुत से लोग इस प्रकार की गलती नहीं करेंगे।

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कई लोग तो ऐसे भी होते हैं जो चोकर के लाभकारी गुणों को जानते हुए भी उसे निकाल-छानकर फेंक देते हैं। इसे तो स्वाद-लिप्सा का दुर्गुण ही कहा जाएगा जिसकी किसी भी प्रकार अनुशंसा नहीं की जानी चाहिए। ऐसे लोगों को समझा सकना भी मुश्किल है। ब्रिटेन में काफी वर्षों पहले चोकर के गुणों जाँच की जा चुकी है। वैज्ञानिकगण प्रयोगों से इस निष्कर्ष पर पहुँचे हैं कि इस प्रकार खाद्य पदार्थों के सर्वाधिक पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। वहाँ तो इसका प्रयोग कई भयंकर बीमारियों के उपचार में पथ्य रूप में भी किया जाता है। तपेदिक, कब्ज, मन्दाग्नि तथा मधुमेह जैसे रोगों की कुछ विशेष अवस्थाओं में एक भाग चोकर और आठ भाग गेहूँ के आटे की रोटियाँ ही खाने को दी जाती हैं। स्नायु दुर्बलता एवं रक्ताल्पता के रोगियों को चोकर की चाय बनाकर पिलायी जाती है। साफ चोकर को उसके छह गुने पानी में मिलाकर आधा घण्टे तक उबालने से चोकर की चाय तैयार हो जाती है। सुस्वादु बनाने के लिए उसमें शहद, चीनी अथवा नींबू का रस भी मिलाया जा सकता है। इसका एक प्याला प्रातः-सायं पीने से स्वस्थ व्यक्तियों को भी काफी लाभ होता है। इसका उपयोग कई व्यक्ति बाज़ार में मिलने वाली चाय के स्थान पर करने लगे हैं। एक ओर जहाँ यह पेय बाल वृद्ध-युवा सभी के लिए स्फूर्तिदायक सिद्ध हुआ है वहीं यह पीने वालों को गले की खराश, सर्दी, जुकाम आदि से भी बचाता है।

गेहूँ के वजन का पाँचवां भाग चोकर होता है परन्तु इस पाँचवें भाग में गेहूँ के सभी पोषक तत्वों का तीन चौथाई हिस्सा समाया होता है। इसका रासायनिक विश्लेषण करने पर पता चला है कि मामूली चोकर में 3 प्रतिशत चिकनाई, बारह प्रतिशत प्रोटीन तथा एक तिहाई भाग स्टार्च होता है। चूने और अन्य खनिज लवणों की मात्रा भी उसमें काफी होती है। एक पौण्ड चोकर वाले आटे में चार ग्रेन चूना होता है, जो शरीर की आवश्यकता के अनुसार पर्याप्त है। आटे का चोकर निकाल दिये जाने पर उसका चूना निकल जाता है। स्मरणीय है चूना शरीर के लिए अत्यावश्यक है। प्राकृतिक रूप से यह आवश्यकता पूरी न होने पर शरीर के कई अंगों को पोषण नहीं मिल पाता। दन्त क्षय का रोग चूने के अभाव में ही होता है। अपने भोजन में बारीक छने आटे अथवा मैदे का प्रयोग करने वालों के दाँत अन्य लोगों की अपेक्षा जल्दी गिरते हैं अथवा खोखले हो जाते हैं।

डा. एम. बुज ने शोध परिणामों द्वारा बताया है कि आटे से चोकर निकाल देने पर उसका आधा लौह तत्व समाप्त हो जाता है। मैदे में तो यह तत्व इससे भी कम रह जाता है। ऐसे आटे में से पोटैशियम का तीन-चौथाई भाग, फास्फोरस का अस्सी प्रतिशत भाग तथा कैल्शियम का आधा भाग निकल जाता है जो शरीर और स्वास्थ्य के लिये निश्चय ही अपोषणकारी है।

स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य सन्तुलन और विजातीय तत्वों में चोकर महत्वपूर्ण भाग अदा करता है। कोष्ठ शोधन में तो यह हरी सब्जियों तथा फलों की तुलना में भी ज्यादा अच्छा साबित हुआ है। कोष्ठ शुद्धि के लिए उपयोग में लाई जाने वाली ज्यादा अच्छा साबित हुआ है। कोष्ठ शुद्धि के लिए उपयोग में लाई जाने वाली दवाओं की तरह यह आँतों को उत्तेजित नहीं करता, बल्कि उन्हें बल और स्फूर्ति प्रदान कर सुचारु रूप से कार्य चलाने में मदद देता है। अतः यह ध्यान रखना चाहिए कि जो आटा हम काम में लाते हैं उसमें से चोकर निकाला नहीं गया हो।

एक और अद्भुत निष्कर्ष वैज्ञानिकों ने विषद अनुसंधान द्वारा निकाला है यह विज्ञान जगत को नयी दिशा देने वाला हो सकता है। हैदराबाद के पोषण अनुसंधान केन्द्र के अनुसार चोकर में कुछ ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो जीन्स की संरचना पर प्रभाव डालते हैं। कोलोन के अतिघातक कैंसर को रोकने में, मधुमेह जैसी महाव्याधि में व्यापक परिवर्तन लाने में तथा रक्त का कोलेस्टाॅल कम करने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका देखी गयी है। पाया यह भी गया है कि यह शरीर की प्रतिरोधी क्षमता को बढ़ाकर इम्यूनोग्लोबुलीन्स की मात्रा रक्त में बढ़ाता है। ऐसी स्थिति में दमा, एलर्जी एवं एड्स जैसे रोगों में भी इसकी उपयोगिता को नकारा नहीं जा सकता। चोकर को आटे का निस्सार भाग मानकर फेंकने के बजाये उसका यदि हम सदुपयोग करना जारी कर दें तो यह एक अमृतोपम औषधि की भूमिका निभा सकता है।

गेहूं में है सबसे अधिक फाइबर (Wheat is the most fiber)

सभी तरह के फाइबर जरूरी हैं, चाहे उन्हें किसी भी स्रेत से प्राप्त किया जा रहा हो। शरीर के लिए इन सभी के अपने-अपने फायदे हैं। गेहूं का चोकर फाइबर का सबसे अच्छा स्त्रोत है। बादाम-अखरोट, चावल जैसे अन्य अनाजों की अपेक्षा गेहूं के चोकर में अधिक फाइबर होता है। साबुत गेहूं और गेहूं के चोकर के फायदों को समझने के लिए भोजन में मौजूद रेशे के विषय में जानना जरूरी है। वनस्पति का वह भाग जो खाने योग्य, लेकिन अपाच्य होता है, आहारीय फाइबर कहलाता है। अलग-अलग तरह के फाइबर की क्रिया भिन्न होती है, इसलिए अच्छी सेहत के लिए विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थ खाना आवश्यक है।

गेहूं का चोकर क्या है? (Wheat bran is?) 

साबुत गेहूं में पाया जाने वाला चोकर अपने स्वास्थ्य संबंधी विभिन्न गुणों के कारण महत्वपूर्ण है। गेहूं के दाने का बाहरी आवरण गेहूं का चोकर है, जिसे सामान्य बोलचाल में गेहूं का छिलका कहा जाता है। गेहूं की पिसाई के समय इसका बाहरी आवरण हट जाता है और अंदरूनी श्वेतसार (स्टार्च) पिस कर आटा बन जाता है। चोकर के कारण गेहूं का आटा भूरा दिखाई देता है। गेहूं के चोकर में अघुलनशील फाइबर होता है, जिसे सैलूलोज कहते हैं। इसमें कैल्शियम, सिलीनियम, मैग्नीशियम, पोटैशियम, फॉस्फोरस जैसे खनिजों के साथ-साथ विटमिन ई और बी कॉम्प्लेक्स पाए जाते हैं। इसलिए जहां मैदा (रिफाइंड आटा) देखने में सुंदर लगता है और कुछ पकवानों को चिकना बनाता है, वहीं छिलका सहित साबुत गेहूं का आटा सेहत के लिए फायदेमंद होता है। आवश्यक फाइबर, विटामिन और खनिजों से भरपूर छिलका सहित गेहूं और इसका चोकर स्टार्च के पाचन के लिए कुदरत का पौष्टिक उपहार है। इसीलिए विशेषज्ञ इसके सेवन पर जोर देते हैं।

चोकर पाचन तंत्र को मजबूत बनाए (Strengthen the digestive system)

हमारी पाचनशक्ति और सामान्य तंदुरुस्ती में फाइबर की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। आहार में फाइबर की कमी होने से पाचनतंत्र उपयुक्त ढंग से काम नहीं करता है। हालांकि, हमारा पाचनतंत्र अस्वास्थ्यकर आहार और भावनात्मक आवेग से उत्पन्न तनाव का कुछ समय तक तो सामना कर सकता है, लेकिन बाद में समस्या खड़ी हो सकती है। इसलिए अपने पाचनतंत्र की शक्ति बनाए रखने के लिए सही कदम उठाना जरूरी है।

चोकर कब्ज से राहत दिलाए (Relieve constipation)

इस बात के वैज्ञानिक प्रमाण हैं कि कब्ज दूर करने और सहज शौच के लिए गेहूं का चोकर सर्वश्रेष्ठ फाइबर है। यह पाचनतंत्र में पदार्थों की गति बनाये रखता है। अनेक लोगों को समय-समय पर पेट फूलने और सुस्ती जैसी पाचन संबंधी गड़बड़ी की शिकायत रहती है। जब हम अनियमित आहार अपनाते हैं और हमारी पाचन क्रिया की गति धीमी हो जाती है तब हालत और भी बिगड़ सकते हैं। लेकिन फाइबर और खासकर गेहूं के चोकर का पर्याप्त सेवन करने से पाचन संबंधी परेशानी और कब्जियत से मुक्ति में मदद मिलती है।

रोज चाहिए 40 ग्राम फाइबर (40 grams of daily fiber needs)

नाश्ते की आदतों पर किए गए अध्ययन के अनुसार एक आम भारतीय नाश्ते में 2 ग्राम या इससे कम फाइबर का सेवन करता है। यह मात्रा कम मानी जाती है। अनुसंधान से पता चला है कि यदि एक वयस्क पुरुष और स्त्री द्वारा क्रमश: औसतन 31 ग्राम और 25 ग्राम फाइबर का सेवन किया जाए तो भी नाश्ते के पोषक तत्वों की कमी दिन भर में पूरी नहीं होती है। आहार-संबंधी निर्देशों के अनुसार आयु और लिंग के आधार पर 2000 कैलोरी युक्त आहार में प्रति दिन के हिसाब से 40 ग्राम फाइबर होना चाहिए। जीवनशैली जनित रोग तेजी से बढम्ते जा रहे हैं और शायद ही कोई व्यक्ति इनकी जकड़ से बचा हो। ऐसे में अपने भोजन में उच्च मात्रा में फाइबर का समावेश करना अनिवार्य है।

कैसे-कैसे फाइबर (How the fiber)

अघुलनशील फाइबर (Insoluble fiber)

अघुलनशील फाइबर जल का अवशोषण नहीं करते हैं।
झाडमू’ की तरह काम करते हैं और आंतों को ‘साफ’ करने में मदद करते हैं।
गेहूं का चोकर और चोकर मिला हुआ साबुत गेहूं, साबूत गेहूं से बने कुछ आहार, मक्के का चोकर, सब्जियां, फल, बादाम, अखरोट आदि में ऐसे फाइबर भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं।

घुलनशील फाइबर (Soluble Fiber)

घुलनशील फाइबर जल का अवशोषण करते हैं।
यह आंतों में ‘स्पंज’ की तरह क्रिया करता है।
जई का आटा, नींबू जाति के फल, सेब, जौ, लोबिया, इसबगोल आदि में ऐसे फाइबर होते हैं।

रोगों में चोकर का प्रयोग (Use bran diseases)

मधुमेह  –

चोकर का हलवा ( बिना चीनी का ) मधुमेह में लाभकारी है , इससे शरीर की निर्बलता भी शीघ्र दूर होती है |

शारीरिक  निर्बलता-

मिटटी के बर्तन में भुने हुए गेहूं लेकर पीस लें | लगभग १५ ग्राम की मात्रा में इस पाउडर को लेकर २० मिली. पानी में धीमी  आंच पर ५ मिनट तक पकाएं  | पकाते से  समय इसे चम्मच चलाते रहें तत्पश्चात आवश्यकतानुसार दूध व गुड या चीनी मिलकर सेवन करें |

रक्ताल्पता/अपच –

अपच और रक्ताल्पता का आपस में गहरा सम्बन्ध है | अधिकतर पाचन की गड़बड़ी से ही रक्तहीनता आती है क्योंकि जब पाचन ही नहीं होगा तो अवशोषण भी ठीक से नहीं हो पाता  फलस्वरूप शरीर में रक्त नहीं बनता और व्यक्ति एनीमिक हो जाता है | पाचन तंत्र की सबलता हेतु चोकर समेत आंटे की रोटी + ब्रानवीटा  का उपयोग करना चाहिए |

भूख न लगना –

गेहूं के चोकर को पानी में भिगो दें ४-५ घंटे बाद इसे चाय की तरह गर्म करके गुड और दूध मिलाकर सेवन करें | इससे भूख लगने लगेगी एवं बल-वीर्य में बृद्धि होगी | आलस्य भी दूर होगा |

बबासीर-

चोकर समेत आंटे की रोटी में गाय का घी लगाकर सेवन करें , साथ में १-२ मूली भी खाएं | बबासीर समाप्त हो जाएगी |

खाज-खुजली –

५०० ग्राम चोकर + १०० ग्राम नमक को तीन लीटर पानी में उबालें | उबलने के बाद उसे छानकर शरीर को धोने से कुजली समाप्त हो जाती है |

कील-मुंहासा-

१०० ग्राम चोकर को लगभग २०० मिली. पानी में शाम को भिगो दें | प्रातः इस चोकर को मसल कर चहरे की धीरे-धीरे मालिश करें | रात्रि सोने से पहले लगभग दो चम्मच ब्रानवीटा दूध में मिलाकर लें | कुछ ही दिनों में मुहांसों से छुटकारा मिल जायेगा |

Source Article :- http://www.livehindustan.com/, http://literature.awgp.org/

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