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चिलगोजा (Chilagoja) के आयुर्वेदिक और औषधीय गुण

चिलगोजा के गुण

चिलगोजा भारत में एक मेवे के रूप में  जाना जाता है । चिलगोजा पाइन के पेड़ के बीज होते हैं और हजारों साल के लिए मूल निवासी अमेरिकयों द्वारा एक खाद्य स्त्रोत के रूप में इस्तेमाल होते रहे हैं । चिलगोजा का रंग लाल भूरा होता है ! इसकी गिरी सफ़ेद रंग की होती है ! इसकी तासीर गर्म होती है ! यह धातुवर्धक होता है  तथा भूख को बढाता है !

चिलगोजा का प्रसंस्करण बहुत ही मेहनत का काम है पर इसका पोषण मूल्य बहुत अधिक है । चिलगोजे को घरेलू संसाधनों से विकसित किया जा रहा है । चिलगोजे की 5 मुख्य प्रजातियां हैं । साइबेरियाई चीड़, कोरियाई चीड़, इतालवी पत्थर चीड़, चिलकोजा चीड़, एकल पत्ती और कोलोराडो । चिलगोजे की फसल के मौसम में महत्वपूर्ण सांस्कृतिक परंपराओं की शुरूआत और पवित्र अनुष्ठानों को मनाया जाता है । चिलगोजा को भोजन और तेल मालिश के रूप में उपयोग होता है । सौन्दर्य उत्पादों और सौंदर्य प्रसाधनों में उपयोग किया जाता है । भुने हुए चिलगोजे सबसे स्वादिष्ट  लगते हैं । चिलगोजे, कुरकुरे मीठे और स्वादिष्ट होते हैं । चिलगोजा दिखने में हाथी दांत रंग के, पतले और लंबे आकार के होते हैं । चिलगोजा अफगानिस्तान, पाकिस्तान, चीन और उत्तर पश्चिमी भारत 1800-3350 मीटर की ऊंचाई पर पेड़ पाये जाते हैं।

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किन्नौर जिला से हर साल करीब पंद्रह सौ क्विंटल चिलगोजे हर साल बेचा जाता है। चिलगोजा 500-900 रुपए प्रति किलो के हिसाब से स्थानीय मंडियों में उपलब्ध होता है समय के साथ चिलगोजे की अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग बढ़ने से यह ड्राई फ्रूट जिला के लोगों के लिए आर्थिकी का बड़ा जरिया बन रहा है। चिलगोजे की फसल पंद्रह माह में तैयार होती है और इसकी विशेषता यह है कि अलगे साल कितनी फसल चिलगोजे के पेड़ पर तैयार होगी, इस बात का पता पहली फसल के तोड़ने से पहले ही टहानियों में तैयार हो रहे कोण से पता चलता है। कार्बोहाईड्रेट और प्रोटीन युक्त चिलगोजा भारत में हिमाचल प्रदेश के किन्नौर और चंबा के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर में भी पाया जाता है। इसके अलावा बलूचिस्तान, पाकिस्तान एवं अफगानिस्तान में भी चिलगोजे के पेड़ पाए जाते हैं। चिलगोजे के पेड़ का बॉटेनिकल नाम पाईनस जियारर्डियाना है जो 10 से 25 मीटर तक ऊंचा हो सकता है। एक पेड़ में 25 से लेकर 400 कोण तैयार हो सकते हैं। कोण से निकाले गए 100 बीज 30 से 40 ग्राम तक वजन के रहते हैं ।

चिलगोजा के औषधीय गुण –

1.चिलगोजा में ओइलिक एसिड मोनेा असंतृप्त वसा अम्ल को अच्छा स्त्रोत है जो रक्त में एच डी एल (अच्छा कोलेस्ट्रॅाल ) के स्तर को बढ़ाने और एल डी एल (खराब कोलेस्ट्रॅाल)  के स्तर को कम करने में मदद करता है । जिससे कोरोनरी धमरी की बीमारियों को रोकने, स्ट्रोक, दिल का दौरा ओर कोनोनरी धमनियों को सख्त होने से तथा स्वस्थ्य रक्त प्रोफाइल बनाए रखने में सहायता करता है ।

2. चिलगोजे में विटामिन ई बहुतायत से पाया जाता है जो शक्तिशाली एंटीआॅक्सीडेंट होने के कारण हानिकारक आॅक्सीजन मुक्त कणों के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करता है ।

3. चिलगोजे में विटामिन बी काॅम्लेक्स, नियासिन, राइबोलेविन और थायमिन अधिक होने की वजह से हारमोन टेस्टोस्टेरोन के स्तर को बढ़ाने में मदद करता है, लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन को बढ़ाता जिससे तनाव और चिंता कम कर , अच्छा मूड बनाने में मदद करता है ।

4. चिलगोजे में मौजूद एंटीआॅक्सीडेंट मुक्त कण को बेअसर करके कैंसर और हृदय रोग होने से बचाते हैं ।

5. चिलगोजा वजन घटाने के लिए सर्वश्रेष्ठ, चिलगोजा में पीनोलेईक एसिड होता है जो भूख महसूस करने पर अंकुश लगाता है जिससे ऐसा महसूस होता है कि पेट भरा हुआ है जो कि एक हार्मोन के द्वारा संपादित होता है और व.जन घटाने में बहुत मदद करता है ।

6. चिलगोजे में खनिज मैग्नीशियम की मात्रा बहुतायत में पायी जाती है जो तंत्रिका और मांसपेशी के कामकाज के लिए ऊर्जा जो कि शर्करा के रूप के लिए आवश्यक है, साथ ही यह प्रतिरक्षा प्रणाली को सुदृड़ करने में मददगार है ।

7. चिलगोजे में कैल्शियम हड्डियों को मजबूत, दांतों को स्वस्थ्य, हृदय और तंत्रिका तंत्र, एवं मांसपेशियों की कार्य क्षमता बढ़ाता है ।

8. चिलगोजे में मौजूद आयरन एनीमिया होने से रोकता है तथा लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण एवं कोशिकाओं की मरम्मत में सहायक है।

9. चिलगोजे में मौजूद पोटेशियम खनिज लवण रक्तचाप को नियंत्रित करने तथा दिल की धड़कन की दर को एक सा बनाए रखने में मदद करता है ।

10. चिलगोजा में फोलेट स्वस्थ्य गर्भावस्था एवं दुग्ध उत्पादन में सहायक है । चिलगोजा का तेल की मीठी सुगंध तथा नाजुक स्वाद होता है, इसे औषधीय के रूप उपयोग किया जाता है ।

11. चिलगोजा खाने से व्यक्ति के शरीर में चुस्ती और फुर्ती के साथ ही साथ अधिक ताकत भी आती है। तथा नपुंसकता दूर होती है !

12. त्वचा का सूखापन दूर करने के लिए, खाना पकाने के लिए, अनेक सौन्दर्य प्रसाधनों एवं पारंपरिक दवाओं में वाहक या बेस तेल के रूप में उपयोग किया जाता है ।

आमतौर पर चिलगोजा के बीज छिलके सहित  पेड़ों से नीचे गिरते हैं और उन्हें इक्टठा कर बाजार में बेचा जाता है । छिलके वाले भुने हुए चिलगोजा बीजों को बंद प्लास्टिक की थैलियों में भी बेचा जाता है । छिलके वाले चिलगोजा बीज का लम्बा जीवन होता है और उन्हें महीनों तक भंडारित किया जा सकता है । साइबेरियाई चिलगोजा को भून कर नमकीन या मीठा करके खाया जाता है । चिलगोजा को बिस्कुट, कुकीज, चाॅकलेट या क्रंच बार बनाने में इस्तेमाल किया जाता है । चिलगोजा को डेसर्ट, संदेस और आइसक्रीम आधारित व्यंजनों में उपयोग होता है ।

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Source Article :- http://drashokakela.blogspot.in/

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