Search

चक्कर Vertigo/dizziness आने के आयुर्वेदिक व औषधीय उपचार

चक्कर (Vertigo/dizziness) आना

चक्कर आने को अक्सर कमजोरी मान लिया जाता है लेकिन बहुत बार ऐसा नहीं होता! चक्कर (Vertigo/dizziness) आना-एक ऐसी परेशानी है, जिसमें व्यक्ति को सब कुछ घूमता नजर आता है। यह अपने आपमें बीमारी नहीं है अपितु एक लक्षण है। शरीर में अन्य परेशानियों के कारण chakker आना प्रारम्भ हो सकता है। यह परेशानी सभी उम्र के लोगों में हो सकती है। बहुधा चक्कर आने के बारे में सही प्रकार से बता पाना मरीज के लिए कठिन होता है। ऐसे में पूरी और सही जानकारी उस समय मरीज को महसूस हो रही चक्कर आने संबंधी परेशानियों को चक्कर आने के अन्य प्रकारों जैसे बेहोशी, सिर का हल्कापन, ड्राप अटैक्स स्थिति के हिसाब से रक्त चाप के घटने-बढ़ने से अलग करके लेना चाहिए।  मरीज को सही और विस्तार से डाक्टर को जानकारी देनी चाहिए

चक्कर आना-तीन प्रकार का होता है-

loading...

1.’ऑब्जेक्टिव’-इसमें व्यक्ति को यह महसूस होता है कि सभी वस्तुएं घूम रही हैं।

2.’सब्जेक्टिव’-इसमें व्यक्ति को यह आभास होता है कि वह स्वयं घूम रहा है।

3. ‘स्यूडो वर्टाइगो‘-इसमें व्यक्ति को सिर के अंदर घूमने का आभास होता है।

चक्कर आने के प्रमुख कारण निम्नलिखित है-

chakker आने का एक आम कारण ‘बिनाइन पैरोक्जिमल पोजीशनल वर्टाइगो’ (बी पी पी वी) है, जिसकी पहचान है गति में उत्तेजना। इसमें अचानक सिर घूमने लगता है अथवा एक ही दिशा में सिर घूमता है। इस प्रकार का ‘वर्टिगो’ बहुत कम गंभीर होता है तथा इसका इलाज आसानी से हो जाता है।

इस बीमारी के कारणों में बहुत से फैक्टर हैं जिनमें सबसे पहला और आम तौर पर पाया जाने वाला कारण “सर्वाइकल स्पान्डिलाइटिस” का है / गर्दन की कशेरुपाओ अथवा cervicak vertebra  या cervical region  मे बनावट में कोई दिक्कत पैदा हो जाये जैसे वर्टिब्रा में ओस्टियोफाइटिक बदलाव आ जायें या वर्टेब्रा की बीच का गैप कम हो जाये और हद्दियां एक दूसरे से रगड़ने लगे या इन्हे जोड़नेवाली बनावटें यथा तेन्डन, लीगामेन्ट्स आदि कड़े पद जायेम अथवा गर्दन की कोई नस दब रही हो या सुजन आ गयी हो तो चक्कर आने लगते है सिर चकराना खासतौर पर गला, आंख, कान, तंत्रिका तंत्र या दिमाग के किसी विशेष हिस्से में आई समस्या की वजह से होता है। जहां खून के दबाव में गड़बड़ी, पानी की कमी व एनीमिया से होने वाले चक्कर के दौरों से आसानी से निबटा जा सकता है, वहीं कुछ मामले गंभीर हो सकते हैं। ऐसा दिमाग के एक हिस्से सेरेब्रल में होने वाले आघात, नर्वस सिस्टम की गड़बड़ी, वेस्टिबुलर सिस्टम या कान में होने वाले वायरल संक्रमण के कारण भी हो सकता है। इसके इलावा मस्तिष्कगत बहुत सी तकलीफे होती है उनके कारण भी चक्कर आने लगते है / हृदय के कई रोगों में भी चक्कर आने लगते है / अगर  मष्तिष्क मे रक्र या खून की मात्रा कम पहुचती तो भी चक्कर आने लगते है / गुर्दे की कुछ तकलीफों में चक्कर आने लगते है / अत्यधिक वीर्यपात या हस्त्मैथुन करने या अत्यधिक सम्भोग करने से भी चक्कर आने लगते है / शराब का नशा, भांग का नशा, कई अन्य नशा करने या तम्बाकू का अधिक सेवन करने से भी चक्कर आते है / किसी कारण से खून की आक्सीजन कम होने लगे तो भी चक्कर आने लगते है /  ब्लड्प्रेशर कम हो जाये तो भी चक्कर आते है और ब्लड्प्रेशर ज्यादा हो जाये तो भी चक्कर आते है / नजर की गड़्बड़ी से भी चक्कर आते है हारमोनल प्रक्रिया मे कोई गद़्बड़ी हो तो उसके प्रभाव से भी चक्कर आ जाते है / रात मे जगने से भी चक्कर आ जाते है !

एक सामान्य स्थिति में सिर को हिलाने पर सिग्नल अंदरूनी कान तक पहुंचता है। अंदरूनी कान में संतुलन नियंत्रित करने वाला तंत्र लेब्रिनथाइन सिस्टम जानकारी को वेस्टिबुलर सिस्टम तक पहुंचाता है, जो संदेश को आगे दिमाग तक पहुंचाता है, जहां से संतुलन, तालमेल और व्यक्ति के हावभाव नियंत्रित होते है। इस पूरे सिस्टम के किसी हिस्से में खराबी आने पर सिर के चकराने की समस्या पैदा होती है। इस आधार पर सिर के चकराने की अवस्था को चार भाग में बांटते हैं।

बेहोशी की अवस्था :  पानी की कमी, दिल की धड़कन में उतार-चढ़ाव, रक्तचाप की अधिक दवाएं लेने व नर्वस सिस्टम के प्रभावित होने पर इस तरह का chakker आता है। इसमें खड़े होने पर आंखों के आगे अंधेरा छाने लगता है।

असंतुलन की अवस्था : अंदरूनी कान में खराबी, सेरेबेलम स्ट्रोक, अधिक शराब पीने, पार्किंसन बीमारी, दृष्टि में खराबी, सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस में अस्थिर रहने का आभास और गिरने की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।

वर्टिगो : यह एक गंभीर किस्म का चक्कर होता है, जिससे पीडि़त व्यक्ति चल फिर नहीं पाते, असंतुलन व चक्कर के दौरे कुछ मिनटों से लेकर घंटों तक जारी रहते हैं। यह अंदरूनी कान या सेंट्रल नर्वस सिस्टम में गड़बड़ी आने से होता है। ये मोशन सिकनेस, साइबर सिकनेस, माइग्रेन, मल्टीपल सिलरोसिस, स्ट्रोक, मिनयर बीमारी आदि के कारण होता है।

सिर हल्का होने की अवस्था : ऐसी अवस्था में अपने आसपास से अरुचि का भाव हो जाता है। तनाव, घबराहट, पैनिक अटैक, बेचैनी और दिल की धड़कन की अनियमितता के कारण ऐसा हो सकता है।

सिर के चकराने के बारह से अधिक कारण हो सकते हैं। इसलिए इसके सही इलाज के लिए सही कारणों की पहचान होना जरूरी होता है। स्थिति के अनुसार प्राथमिक जांच में एमआरआई, गले का एक्स-रे, कान, नाक और हार्मोन की जांच तथा नियमित खून की जांच करवायी जाती है। कोई ठोस जांच प्रणाली उपलब्ध नहीं होने की वजह से मरीज द्वारा दिया गया विवरण खासा महत्वपूर्ण होता है।

chakker आने की पहचान
शुरू में सिर घूमता है और फिर थोड़ी देर बाद चक्कर आने बंद हो जाते हैं| जो लोग दूषित वातावरण में रहते हैं या जिनका शरीर बहुत कमजोर होता है, उन्हें थोड़ा-सा कम करने के बाद भी चक्कर आने लगते हैं| कुछ लोग एक स्थान पर देर तक खड़े नहीं रह पाते| उनको chakker आने लगते हैं और वे वहीं गिर पड़ते हैं| तेज धूप, कड़ाके की ठंड या अधिक पसीना आने पर भी चक्कर आ जाते हैं| इसमें आंखों के सामने अंधेरा, चारों तरफ की चीजें घूमती हुई और मन में एक प्रकार की सुस्ती-सी मालूम पड़ती है| कई बार chakker खाकर गिर पड़ने के बाद व्यक्ति बेहोश भी हो जाता है|

आयुर्वेद की जड़ी “जवासा” का काढा शहद मिलाकर दिन मे दो बार पीने से सभी प्रकार के चक्कर ठीक होते है / लेकिन मुकम्मल इलाज के लिये आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह लेना चाहिये! चक्कर आना अपने आप मे बीमारी नही मानी जाती यह किसी दूसरी बीमारी का expression  है , जिसे मूल रूप से उपचार करक ठीक करना चाहिये

चक्कर आने के घरेलू उपचार :

  1. 2 लौंग को 2 कप पानी में डालकर उबालकर पीने से chakker आना बन्द होते हैं।
  2. छोटी इलायची के काढ़े को गुड़ में मिलाकर सुबह-शाम पीने से बार-बार chakkerआना बन्द हो जाता है।
  3. यदि गर्मी के कारण chakkerआते हों व जी मिचलाता हो तो आंवले का शर्बत पीना चाहिए।
  4. एक गिलास दूध में एक चम्मच देशी घी, एक चम्मच पिसी मिश्री तथा तुलसी की चार पत्तियां डालकर पी जाएं| chakker आना बंद हो जाएगा|
  5. खरबूजे के बीज को घी में भून लें| फिर इनको पीसकर 6 ग्राम से 10 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम सेवन करें|
  6. 10 ग्राम कालीमिर्च को 250 ग्राम शक्कर में मिलाकर देशी घी में भूनकर कतली जमा लें| फिर 5 ग्राम की एक कतली सुबह दूध के साथ सेवन करें|
  7. गेहूं के 10 ग्राम चोकर में कालीमिर्च के चार दाने पीसकर मिलाएं| फिर इसका काढ़ा बनाकर सेवन करें|
  8. तुलसी, कालीमिर्च तथा जौ – तीनों का काढ़ा बनाकर पीने से सिर के चक्कर जाते रहते हैं|
  9. मुनक्के के कुछ दाने तवे पर भूनकर उनमें नमक लगाकर चबा-चबाकर कुछ दिनों तक खाएं|
  10. 10 ग्राम सौंफ का चूर्ण 250 ग्राम खांड़ में मिलाकर रख लें| इसमें से दो चम्मच चूर्ण खाकर पानी पी लें|
  11. यदि पेट में अधिक गैस (वायु) बनने के कारण सिर में चक्कर आ रहे हों तो गुनगुने पानी में आधा नीबू तथा एक चुटकी खाने वाला सोडा डालकर पी जाएं| चक्कर आने बंद हो जाएंगे|
  12. पिसी हुई हल्दी पानी में मिलाकर माथे पर लेप करने से मस्तिष्क के चक्कर दूर हो जाते हैं|
  13. धूप में थोड़ा-सा पानी रखकर उसमें 10-15 मुनक्के डाल दें| तीन-चार घंटे में पानी गरम हो जाएगा और मुनक्के की पकौड़ी बन जाएगी| अब मुनक्कों को पानी में मथकर जरा-सा शहद डालकर शरबत पी जाएं|
  14. 10 ग्राम पिसी सोंठ को घी में मिलाकर सेवन करने से भी चक्कर आने बंद हो जाते हैं|
  15. दो बादाम, चार दाने पिस्ते तथा दो दाना सफेद इलायची – सबको आधा किलो दूध में औटाकर पिएं|
  16. बादाम, पिस्ते, इलायची आदि कुचलकर खाएं|
  17. लगभग 4 या 5 मुनक्के को पानी में मथकर पीने से चक्कर आना बन्द हो जाते हैं।
  18. प्याज के रस को सूंघने से चक्कर आना ठीक हो जाता है।
  19. सौंफ को पीसकर सिर पर लगाने से गर्मी के कारण आने वाले चक्कर और सिर दर्द ठीक हो जाते हैं।
  20. तुलसी के पत्तों का रस 5 बूंद और चीनी एक चम्मच पानी में आधा कप पानी में मिलाकर सेवन करने से लू के मौसम में चलने वाली गर्म हवा नहीं लगती है तथा chakker नहीं आते हैं।
  21. तुलसी का रस, अदरक का रस और शहद मिलाकर पीने से chakker आने बन्द हो जाते हैं।
  22. चीनी और सूखा धनिया 2-2 चम्मच मिलाकर चबाने से chakker आना बन्द हो जाता है
  23. एक कप गर्म पानी में लगभग 2 चम्मच नींबू का रस मिलाकर पीने से chakker आना बन्द होता है।
  24. कालीमिर्च चबाने से जी नहीं मिचलाता और चक्कर नहीं आते।

चक्कर आने पर ध्यान रखने योग्य बातें 

  • चक्कर आने पर इसे नजरंदाज न करें।
  • किसी भी कार्य को झटके के साथ करने से बचें।
  • सिर में किसी प्रकार का झटका न लगने दें।
  • अधिक दूरी तक वाहन चलाने, ऊंचाई पर चढ़ने तथा तैरने से बचें। यदि अत्यंत आवश्यक हो तो किसी व्यक्ति को साथ रखें।

चिकित्सक की सलाह कब लेंअधिकांश मामलों में चक्कर आने में कोई नुकसान नहीं होता है तथा इसका इलाज सहज होता है लेकिन कुछ मामले गंभीरता लिये होते हैं, जिसके लिए तुरन्त विशेषज्ञ परामर्श एवं बेहतर चिकित्सा की आवश्यकता है। निम्नलिखित परेशानी होने पर अविलंब चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए-

  • कोई भी वस्तु दो दिखाई देती हो (डबल विजन)।
  • सिरदर्द
  • कमजोरी
  • बोलने में परेशानी
  • असामान्य नेत्र गतिविधि
  • बदली हुई चेतना (आल्टर्ड लेवल ऑफ कांशियसनेस), उपयुक्त क्रियाकलाप का अभाव अथवा परेशानी उत्पन्न होना
  • चलने में परेशानी अथवा हाथ और पैर को नियंत्रित करने में कठिनाई।

चक्कर आने से संबंधित ऊपर दी गयी जानकारियां पाठकों की जागरूकता के लिए है। कई बार बीमारी के बारे में जानकारी न होने के कारण लोग लापरवाही कर जाते हैं तथा साधारण सी बीमारी भी गंभीर रूप ले लेती है। अत: पाठकों से निवेदन है कि उपरोक्त जानकारी के आधार पर सावधानी जरूर बरतें परन्तु स्वयं चिकित्सा न करें तथा चक्कर आने की परेशानी जब कभी उत्पन्न हो तो चिकित्सक से सलाह लेने में विलंब न करें। किसी भी चक्कर के मरीज को नाक, कान व गला रोग विशेषज्ञ, न्यूरोलॉजिस्ट, हड्डी के शल्य चिकित्सक, नेत्र रोग विशेषज्ञ, हृदय रोग विशेषज्ञ एवं जनरल फिजिशियन की सलाह की आवश्यकता पड़ सकती है। जांच में एक ‘बेसिक इन्वेस्टिगेशन’ खून के-‘हीमोग्लोबीन’ की जांच से लेकर दिमाग के सी टी स्कैन तक की भी आवश्यकता पड़ सकती है। किसी भी चक्कर को चाहे वह कुछ सेकण्ड के लिए ही आता है, गैर गंभीरता से न लें, क्योंकि यह किसी बड़ी बीमारी की चेतावनी हो सकती है।

बीमारी के मूल कारण को दूर कर देने या मूल बीमारी का इलाज / उपचार  कर देने से  चक्कर आने की तकलीफ जड़ मूल से समाप्त हो जाती है!

अपील:- दोस्तों  यदि आपको  पोस्ट अच्छा लगा हो तो इसे नीचे दिए बटनों द्वारा Like और Share जरुर करें ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इस पोस्ट को पढ़ सकें हो सकता आपके किसी मित्र या किसी रिश्तेदार को इसकी जरुरत हो और यदि किसी को इस post से मदद मिलती है तो आप को धन्यवाद जरुर देगा.

Article Source :- http://www.panchjanya.com/https://cure100.wordpress.com/https://spiritualworld.co.in/

Loading...
loading...

Related posts