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घृतकुमारी आज के समय की संजीवनी बूटी

घृतकुमारी के आयुर्वेदिक और औषधीय गुण

घृतकुमारी या एलोवेरा या ग्वार पाठा का पौधा हमारे जीवन के लिए संजीवनी बूटी, साइलेंट हीलर, चमत्कारी औषधि से कम नहीं  है . इसमें रोग निवारण के गुण भरे पड़े हैं। आयुर्वेद में इसे घृतकुमारी की ‘उपाधि’ मिली हुई है तथा महाराजा का स्थान दिया गया है। औषधि की दुनिया में इसे संजीवनी भी कहा जाता है। इसकी 200 जातियां होती हैं, परंतु प्रथम 5 ही मानव शरीर के लिए उपयोगी हैं। इसका प्रयोज्य अंग इसके डंठलों में पाया जाने वाला चिकना पदार्थ है जिसे पल्प कहा जाता है. इसमें एलो बाबिड़ेंसिस को मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए सबसे ज्यादा लाभदायक मन जाता है. इसकी तासीर गर्म होती हैं इस पौधे का रस बुढ़ापा प्रतिरोधी तत्व है. इसके प्रयोग से इंसान लम्बे समय तक अंदरूनी और बाहरी तौर पर जवान बना रह सकता है. ग्वार पाठे का पौधा गरम और खुश्क जलवायु में पनपता है इसे ज्यादा खाद या सिंचाई की जरुरत नहीं होती.

रासायनिक घटक – इसके रस में १८ अमीनो एसिड ,१२ विटामिन और २० खनिज पाए जाते है इसके अलावा कई अन्य अनजाने यौगिग तत्व भी इसमें पाए जाते है. पौधे का सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हिस्सा है, इसका रस जिसे बाजार में एलो जेल के नाम से जाना जाता है. एलोवेरा का रस इसके पत्तों से तब निकाला जाता है जब पत्ते तीन साल के हो जाते है. तभी उस रस में अधिकतम पोष्टिक तत्व,और औषधीय गुण मौजूद होते है.इसके पत्तो से रस निकाल कर या  बाजार से खरीदकर पिया जा सकता है. 

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प्राकृतिक उत्पाद होने के कारण न तो घृतकुमारी का कोई साइड इफेक्ट होता है और न ही इसके प्रयोग से कोई व्यक्ति इसका आदि होता है बल्कि यह जैविक रूप से शरीर के लिए एकदम उपयुक्त होता है. इसके रस के सेवन से जहाँ बीमार व्यक्ति अपना स्वास्थ्य ठीक कर सकता है वहीँ स्वस्थ व्यक्ति इसके सेवन से अपने स्वास्थ्य को बनाए रखकर अधिक समय तक जवान बना रह सकता है.

 Aloe vera today ‘s lifesaving herb

घृतकुमारी या एलोवेरा या ग्वार पाठा के औषधीय गुण :- 

  1. त्वचा पर झाइयाँ , झुर्रियां पड़ जाएँ तो घृतकुमारी के गूदे की मालिश करने से त्वचा पर चमक आ जाती है
  2. त्वचा जल जाए तो घृतकुमारी के गूदे से ज्यादा बढ़िया इलाज हो ही नहीं सकता . जलन तो तुरंत ही समाप्त हो जायेगी . बहुत जल्दी recovery हो जाएगी और निशान तो पड़ेगा ही नहीं .
  3. अगर त्वचा पर कोई पुराना निशान हो या त्वचा सख्त हो गई हो तो इसके गूदे और शहद को उस पर लगाकर तीन चार घंटे के लिए छोड़ दो और फिर धो दो . 
  4. अगर गठिया (arthritis) की बीमारी है , तो इसके गूदे को सरसों के तेल में मिलाकर मालिश करो और इसका गूदा गर्म करके बांधलो . अगर साथ ही थोडा गूदा खाली पेट खा लिया जाए तो सोने पर सुहागा होगा
  5. अगर पाचन ठीक तरह से नहीं हो रहा या लीवर खराब है तो इसे सब्जी या लड्डू बनाकर खाएं ; या फिर इसका गूदा खाली पेट खा लो .
  6. E S R ज्यादा है तब भी यह बहुत मददगार है . इसके एक लिटर गूदे में पचास ग्राम काला नमक डालो और दस ग्राम काली मिर्च . फिर 60 ml निम्बू का रस मिलाकर कांच के  मर्तबान में रखकर दस-पन्द्रह दिन धूप में रखो . यह स्वादिष्ट गूदा एक चम्मच सवेरे शाम लेते रहने से liver ठीक रहता है .
  7. शुगर की बीमारी में घृतकुमारी का गूदा लेते रहने से फायदा होता है .
  8. घृतकुमारी से कुमारी आसव बनाया जाता है . यह पेट के लिए लाभदायक है. ulcer या कब्ज़ होने पर इसके रस में एरंड का तेल डालकर ले लें
  9.  सिरदर्द होने पर माथे पर इसका लेप कर लो .
  10. अगर माईग्रेन की समस्या है तो साथ में मेधावटी भी सवेरे शाम ले लो .
  11. घृतकुमारी खाने से और सर और माथे पर लेप करने से आँखों की रोशनी भी बढ़ती है .
  12. ऑंखें मूँद कर घृतकुमारी के गूदे को रूई में लगाकर एक दो घंटे के लिए पलकों पर रखकर पट्टी बांध लो . इससे आँख के सभी रोग दूर होंगे और आँखों की रोशनी भी बढ़ेगी .
  13. बाल सफ़ेद हो रहे हैं तो घृतकुमारी का गूदा खाइए और साथ में सिर पर लेप कीजिये– इसका गूदा ,भृंगराज ,दही और मुल्तानी मिटटी को मिलाकर. बस फिर चमत्कार देखिये और प्रसन्न हो जाइए
  14. गंजे भी घृतकुमारी के गूदे को सिर पर नियमित रूप से लगाएँ , तो निश्चित रूप से फायदा होगा .
  15. इससे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता (immunity) बढती है .
  16. हर तरह की सूजन में घृतकुमारी का लेप फायदा करता है.
  17. घृतकुमारी को नियमित रूप से लेने पर रक्तअल्पता (anemia) की बीमारी ठीक होती है .
  18. घृतकुमारी के गूदे को खाने से शरीर के हारमोन भी संतुलित रहते हैं .
  19. यदि महिलाओं को पीरियड के दौरान अधिक bleeding हो तो प्रात:काल 20 ग्राम गूदे में 3 ग्राम गेरू का पावडर मिलाकर ले लो .
  20. छोटे से बच्चे को motion नहीं आ रहा हो तो इसके गूदे में हींग भूनकर मिला लो और बच्चे की नाभि के आसपास लगा दो . यदि पेट में दर्द या अफारा हो तो इसका बीस ग्राम गूदा ले सकते हैं .
  21. घृतकुमारी को प्रयोग करने से कैंसर में भी लाभ देखा गया है .
  22. खांसी में इसका टुकड़ा लेकर गर्म करें , फिर उसपर काली मिर्च और काला नमक लगाकर खाएं .
  23. स्तन में गाँठ होने पर घृतकुमारी को एक तरफ से छीलकर गर्म करके बाँध लें .
  24. कमर दर्द , slip disc या sciatica की परेशानी हो तो इसका गूदा आटे में गूंधकर रोटी खाओ .
  25. इसका गूदा लेने से बच्चों की allergy भी ठीक हो जाती है.
  26. बच्चे बिस्तर में पेशाब करते हों तो भुने काले तिल, गुड और घृतकुमारी को मिलाकर लड्डू बनायें और बच्चों को खिलाएं . ये लड्डू prostrate gland बढ़ने पर भी लिए जा सकते हैं .
  27. खुजली या शीत पित्त होने पर घृतकुमारी, नारियल तेल , कपूर और गेरू का शरीर पर लेप करके रखें और कुछ देर बाद नहा लें.
  28. सर्दी , जुकाम हो या food poisoning हो जाए ; किसी प्रकार की एलर्जी हो या लीवर की समस्या हो, यह सभी में मदद करता है
  29. कान दर्द में घृतकुमारी के गुदे का रस को आंच पर गर्म कर जो आराम से सहन कर सके जिस कान में दर्द हो उसकी दूसरी तरफ के कान में दो बूंद रस डालने से कान दर्द ठीक होता है |
  30. बवासीर रोगीं के लिए तो यह रामबाण औषधि है | घृतकुमारी की सब्जी बनाकर खाने से लाभ होता है और इसका रस पिने से पेट ठीक रहेगा |

घृतकुमारी की बारना डेंसीस नाम की जाति प्रथम स्थान पर है। इसमें 18 धातु, 15 एमीनो एसिड और 12 विटामिन मौजूद होते हैं। इसकी तासीर गर्म होती हैं। यह खून की कमी को दूर करता है तथा शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। यह खाने में बहुत पौष्टिक होता है। इसे त्वचा पर लगाना भी उतना ही लाभप्रद होता है। इसकी कांटेदार पत्तियों को छीलकर एवं काटकर रस निकाला जाता है। 3-4 चम्मच रस सुबह खाली पेट लेने से दिन-भर शरीर में शक्ति व चुस्ती-स्फूर्ति बनी रहती है।

आजकल घृतकुमारी का प्रयोग सौंदर्य प्रसाधनों में किया जाता है. परन्तु यह मात्र इसी उपयोग के लिए नहीं है ,घृतकुमारी के अन्य बहुत सारे महत्वपूर्ण उपयोग हैं . जिसमे सबसे अधिक महत्वपूर्ण है की अचानक जल जाने या कट जाने पर इसके लगाने से तुरंत आराम मिलता है. पेप्टिक अल्सर में यानि की अन्त्रों में छाले हो जाने पर इसके रस को पीने से छालों का घाव भर जाता है और एसिडिटी में आराम मिलता है ,घृतकुमारी हमारी शारीरिक और मानसिक क्षमताओं की वृद्धि करता है.

घृतकुमारी में ऐसा घी है, जो हमें हमेशा कुमार या कुमारी रखता है. तभी तो इसका नाम घृतकुमारी है

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