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गुलाब के फूल (Rose) के आयुर्वेदिक व औषधीय गुण

गुलाब के फूल (Gulab ) की खुशबू

गुलाब के फूल का रंग ही नहीं खुशबू भी हमारे मन-मस्तिष्क पर गहरे एवं अनुकूल प्रभाव छोड़ती है। रंग एवं सुगंध का समग्र मिश्रण रंग-बिरंगे सुरभित पुष्प हैं, जिनकी एक झलक भर से हमारा तन-मन तरोताजा हो उठता है। दुनिया भर में विभिन्न तरह की शारीरिक एवं मानसिक व्याधियों से ग्रस्त लोगों को स्वास्थ्यलाभ प्रदान करने के लिए पुराने समय से पुष्प चिकित्सा का प्रयोग किया जाता रहा है।

आज भी चिकित्सा की यह विधि प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से लाखों लोगों के जीवन में आशा एवं स्वास्थ्य का एक नया उजियारा बिखेर रही है। अंतर्राष्ट्रीय रंग विशेषज्ञ लियेट्रिस इसमेन के अनुसार-‘रंग हमारे चित्त को शांत एवं प्रसन्न करते हैं, जिससे उत्पन्न सुखद अनुभूति हमारे जीवन में ऊर्जा एवं उत्साह का एक नया संचार पैदा करती है।’ वैज्ञानिक शोधों से पता चला है कि फूलों और पौधों का हमारी मानसिक अवस्था और भावनाओं पर हितकारी प्रभाव पड़ता है। फूलों की मौजूदगी ही हमारे मन को प्रफुल्लित कर देती है। पुष्प चिकित्सा से न केवल मनुष्य के शारीरिक दोष ही ठीक होते हैं, अपितु यह अप्रत्यक्ष रूप से रंग चिकित्सा होने के कारण दोहरे लाभ प्रदान करती है। फूल हमारी गं्रथियों की सक्रियता को बढ़ाते हैं, जिससे हमारे जीवन पर सकारात्मक प्रभाव दृष्टिगोचर होता है। पुष्प चिकित्सा हमारी ग्रंथियों से लाभकारी स्राव उत्सर्जित करती है, जिससे हमारे स्वास्थ्य पर दीर्घ एवं अनुकूल प्रभाव पड़ते हैं। विभिन्न रंगों के फूल हमारे शरीर पर निम्नलिखित तरह से प्रभाव डालते हैं- लाल रंग: लाल रंग शक्ति का प्रतीक है।

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लाल गुलाब के फूल हमारी ऊर्जा में वृद्धि करते हैं। ये हमारी ‘एड्रीनल ग्रंथि’ को प्रभावित करते हैं। लाल गुलाब की पंखुड़ियों से निर्मित गुलकंद हमारे उदर विकारों को दूर कर शरीर की गर्मी को कम करता है। इसके नियमित सेवन से हमारे होंठ गुलाब की पंखुड़ी जैसे ही लाल बनते हैं। फूलों से बने मुकुट को किसी निश्चित समय के लिए पहनना ‘पुष्प आयुर्वेद’ की उपचार पद्धति का हिस्सा रहा है। प्राचीन वैद्यों में ‘चक्रम’, ‘भगवान’ आदि को पुष्प चिकित्सा में महारत हासिल थी। उन्होंने इस पद्वति का सफलतापूर्वक सुनियोजित तरीके से प्रयोग किया। फूलों की सुगंध, उन्हें तोड़ने के समय, दवा में प्रयोग की विधि, दवा लगाने में किस तरह की चीजों का प्रयोग करना चाहिए आदि का पता देती है। वर्तमान समय में सेहत और पर्यटन के बढ़ते महत्व के कारण पुष्प आयुर्वेद को एक नई पहचान मिली है। निजी क्षेत्र के बहुत सारे आयुर्वेदिक संस्थान इस दिशा में सार्थक कदम बढ़ा रहे हैं। ऋषिकेश स्थित ‘आनंदा’ तथा केरल में अनेक पर्यटक स्वास्थ्य गृहों में पुष्प चिकित्सा का प्रयोग हो रहा है। उत्तरांचल के सुदूरवर्ती क्षेत्रों में भी विभिन्न आश्रम इस विधि को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका अदा कर रहे हैं। विभिन्न आयुर्वेदिक औषधियों में फूलों का प्रयोग किया जा रहा है।

गुलाब के फूल -: फूल किसको पसंद नहीं होते हैं। फूलों की तरह हर कोई महकना भी चाहता हैं। सब फूलों से सबसे प्यारा गुलाब के फूल होते हैं गुलाब के फूल और शायद ही कोई ऐसा वयक्ति हो, जिसे गुलाब के फूल पसंद न हों। हर कोई गुलाब के फूलों से अपने घर को सजाना चाहता हैं। अपने घर के कोने-कोने में गुलाब के फूल को लगाना चाहते हैं। यह पौधा अपने औषधीय गुणों के लिए भी जाना जाता है। गुलाब का पौधा व गुलाब के फूल पूरे भारत में मिलते है। यह फूल विटामिन सी से भरपूर होता है। साथ ही साथ गुलाब के फूल का रस खून को साफ भी करता है। गुलाब के फूल का शर्बत दिमाग को शीतल और शक्ति देता है। आयुर्वेद में गुलाब को महाकुमारी, शतपत्री व तरूणी आदि नामों से जाना जाता है। शाही जमाने में राजकुमारियों, रानियां एवं सुंदरियों भी गुलाब के पानी से नहाती थी और गुलाब के फूलों से  अपने महलों को भी सजाती थी। गुलाब की पंखुडि़यों से बना लेप और उबटन रानियां अपनी चेहरे की सुंदरता को निखारने के लिए अपने इस्तेमाल में लाती थी। गुलाब एक फूल ही नहीं हैं बल्कि एक जड़ी-बूटी भी हैं जो सुंदरता को निखारने के साथ हमारे स्वास्थय के लिए भी अच्छा होता हैं। गुलाब के साथ-साथ गुलाब जल भी बहुत गुणवान होता हैं। गुलाब जल थकी हुई आंखों को तुरंत आराम प्रदान करने में बहुत मददगार होता हैं। और गुलाब जल को आंखो में डालने से एक नयी सी चमक आती हैं। अगर आप अधिकतर समय कंप्यूटर पर ही काम करते हैं तो गुलाब जल को अपनी आंखों में डालना न भूलें। इससे आपकी आंखें फ्रेश सी रहती और थकान भी मिट जाती हैं। यहाँ तक की कुछ लोग गुलाब के फूल का इस्तेमाल अपने प्यार  का इज़हार करने के लिए भी करते हैं। हर चीज़ की अपनी अपनी जगह पर एक अलग ही पहचान होती हैं। कुछ लोग अपने स्वास्थय के लिए व कुछ लोग अपनी सुंदरता को बढ़ाने के लिए व कुछ अपने लोग अपने प्यार का इज़हार करने के लिए गुलाब के फूल का  इस्तेमाल करते हैं ।

गुलाब के फूल (Rose) के आयुर्वेदिक व औषधीय गुण 

    1. त्वचा के लिए गुलाब
      अगर आपकी त्वचा शुष्क है, तो गर्मियों में अपनी त्वचा पर चंदन पाउडर में गुलाब जल मिला कर लगाएं। त्वचा मुलायम होगी और पिंपल्स से भी निजात मिलेगी। रोज सुबह चेहरा धोने के बाद एक चम्मच गुलाब जल में नीबू की कुछ बूंदें मिला कर हल्के हाथों से लगा कर धोएं। इससे त्वचा का कालापन कम हो जाएगा। मुहांसों के पुराने दागों पर नियमित गुलाब जल में शहद मिला कर लगाएं। दाग दूर हो जाएंगे।
    2. गुलाब के फूल की पंखुड़ियां खाने से मसूढ़े और दांत मजबूत होते हैं। मुंह की बदबू दूर होती है और पायरिया रोग से भी निजात मिल जाती है।
    3. गुलाब में विटामिन सी बहुत मात्रा में पाया जाता है। गुलकंद रोज खाने से हड्डियां मजबूत हो जाती है। रोजाना एक गुलाब खाने से टी.बी के रोगी को बहुत जल्दी आराम मिलता है।
    4. गुलाब की पत्तियों को ग्लिसरीन डालकर पीस लें। इस मिश्रण को होंठों पर लगाएं। इससे होंठ गुलाबी और चिकने हो जाते हैं।
      अर्जुन की छाल और देसी गुलाब मिलाकर पानी में उबाल लें। यह काढ़ा पीने से दिल से जुड़ी बीमारियां दूर रहती है। दिल की धड़कन बढ़ रही हो तो सूखी पंखुड़ियां उबालकर पिएं।
    5. आंतों में घाव हों तो 100 ग्राम मुलेटी ,50 ग्राम सौंफ ,50 ग्राम गुलाब की सूखी हुई पंखुड़ियां तीनों को मिलाकर पीस लें। रोजाना इस चूर्ण को दस ग्राम की मात्रा में लें।
    6. आंखों में गर्मी के कारण जलन हो या धूल मिट्टी से आंखों में तकलीफ हो तो गुलाबजल से आंखें धोने पर आराम मिलता है। रतौंधी नामक आंखों के रोग के लिए गुलाब जल अचूक दवा का काम करता है।
    7. गुलाब की पंखुडियां को सूखाकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को चेचक के रोगी के बिस्तर पर डालने से उसे ठंडक और आराम मिलता है।
    8. गुलाब को पीस कर लेप बनाकर सिर पर लगाने से सिर दर्द थोड़ी देर में गायब हो जाता है।

    9. गुलाब के फूल का रोजाना सेवन करने से क्षय रोग अर्थात टीबी के मरीज को राहत मिलती हैं ।
    10. गुलाब गर्मी के मौसम में होने वाली बेचैनी ,घबराहट जैसी समस्याओं के लिए भी बहुत अच्छा होता हैं। इसे रोज़ाना सुबह खाने से राहत मिलती हैं ।
    11. आंखों में होने वाली समस्याओं के लिए भी गुलाब बहुत फ़ायदा देता हैं । आंखों में गर्मी के कारण जलन हो या धूल मिट्टी जाने से आंखों में तकलीफ हो रही हो तो गुलाब जल से आंखों को धोने से आराम मिलता हैं ।
    12. गुलाब का तेल बुखार को आने से भी रोकता हैं। गुलाब में मौजूद एंटी इंफ्मेंटेरी तत्‍व सूक्ष्म जीवाणु संक्रमण के कारण सूजन, रसायन, अपच और निर्जलीकरण को कम करने में मदद करता हैं।
    13. गुलाब जल का प्रयोग एक हर्बल चाय के रूप में भी किया जा सकता हैं। यह पेट के रोगों और मूत्राशय में होने वाले संक्रमण को दूर करने के काम आती हैं । और साथ ही गर्मी के दिनों में गुलाब को पीस कर उसका लेप बना कर माथे पर लगाने से सिर दर्द भी ठीक हो जाता हैं ।
    14. गुलाब के तेल में मौजूद एंटीसेप्टिक गुण घावों को जल्दी भरने में मदद करते हैं । घाव पर गुलाब का तेल लगाने से संक्रमण भी नहीं फैलता हैं ।
    15. गुलाब के फूल में विटामिन ए, बी 3, सी, डी और ई से भरपूर होता हैं । इसमें उच्‍च मात्रा में  विटामिन सी होने के कारण डायरिया के इलाज के लिए इसका प्रयोग किया जाता हैं। गुलाब के फल में फ्लवोनोइड्स, बायोफ्लवोनोइड्स, सिट्रिक एसिड, फ्रुक्टोज, मैलिक एसिड, टैनिन और जिंक भी होता हैं।
    16. गुलाब जल में बालों की देखभाल के प्रभावी गुण होते हैं। इसे बालों में लगाने से बालों की जड़ों में ब्लड के सर्कुलेशन में सुधार होता हैं। जिससे बालों के विकास में मदद मिलती हैं। इसके अलावा यह बालों को मजबूत और लचीला बनाने के लिए एक कंडीशनर का भी काम करता हैं ।
    17. त्वचा के लिए गुलाब जल बहुत लाभदायक होता हैं । गुलाब जल के प्रयोग का सबसे बड़ा फायदा यह हैं कि गुलाब जल एक  प्राकृतिक एस्ट्रिंजेंट होने से यह एक सर्वश्रेष्‍ठ टोनर भी हैं । रोज रात को सोने से पहले इसे लगाने से त्वचा टाइट होती हैं, यह त्वचा के पीएच संतुलन को बनाएं रखता हैं और मुंहासों को दूर करने में भी मदद करता हैं ।
    18. गुलाब का शर्बत मस्तिष्क को बल व शीतलता प्रदान करता है।
    19.  दाह, मुखपाक, मुखशोथ होने पर गुलकंद लाभकारी होता है। – नेत्र विकारों में गुलाबजल का प्रयोग किया जाता है।

गुलाब के घरेलू नुस्खे :- 

    1.  गुलाबजल में फिटकरी मिलाकर उपयोग करने से कई रोग नष्ट होते हैं।
    2. गुलाब के अर्क में सफेद चंदन व कपूर पीसकर माथे पर लेप करने से सिरदर्द दूर होता है।
    3. गुलाब की पत्तियों के रस की कुछ बूंदें कान में डालने से कर्णशूल में राहत मिलती है।
    4. गुलाब के अर्क में चंदन का तेल मिलाकर मालिश करने से शीत पित्त में लाभ होता है।
    5. गुलाब के फूल, लौंग, अकरकरा और शीतल चीनी को पीसकर गुलाब जल के साथ गोलियां बनाकर चूसने से मुंह की दुर्गंध दूर होती है।
    6. प्रात:काल गुलकंद खाने से मुंह के छाले ठीक होते हैं।
    7. हाथ-पैर या पूरे शरीर में जलन होने पर चंदन में गुलाबजल मिलाकर लेप करें।
    8. एक कप गुलाब जल, चौथाई कप चूने का पानी, चौथाई कप संतरे का रस मिलाकर दिन में दो बार पीने से सीने में जलन, गले में जलन, जी मिचलाना आदि रोग नष्ट होते हैं।
    9. जलन या बहुत ज्यादा गर्मी हो तो गुलाब की पंखुड़ी 10 ग्राम, इलायची 5, काली मिर्च 5 तथा मिश्री 10 ग्राम पीसकर हर चार घंटे पर पिलाएं।
    10. दाद पर गुलाब के अर्क में नींबू का रस मिलाकर लेप करें।
    11. लू लगने पर गुलाबजल, पानी में मिलाकर माथे पर पट्टी रखें।
    12. आधा सीसी के दर्द में एक ग्राम असली नौसादर को 12 ग्राम गुलाबजल में मिलाकर हिला लें। नाक में चार-पांच बूंद दवा की टपकाकर नाक के अंदर खींच लें। कुछ ही देर में सिरदर्द में आराम होगा।
    13. सुबह-सबेरे अगर खाली पेट गुलाबी गुलाब की दो कच्ची पंखुड़ियां खा ली जाएं, तो दिन भर ताजगी बनी रहती है क्योंकि गुलाब बेहद अच्छा रक्त शोधक है।
    14. अस्थमा, हाई ब्लड प्रेशर, ब्रोंकाइटिस, डायरिया, कफ, फीवर, हाजमे की गड़बड़ी में गुलाब का सेवन बेहद उपयोगी होता है।
    15. गुलाब की पंखुड़ियों का इस्तेमाल चाय बनाने में भी होता है। इससे शरीर में जमा अतिरिक्त टॉक्सिन निकल जाता है। पंखुड़ियों को उबाल कर इसका पानी ठंडा कर पीने पर तनाव से राहत मिलती है और मांसपेशियों की अकड़न दूर होती है।
    16. पेट दर्द, यूरीन से जुड़ी दिक्कतों में भी गुलाब की पंखुड़ियों का पानी कारगर साबित होता है।
    17. आंखों की जलन, खुजली दूर करने के लिए दोनों आंखों में 2-2 बूंद गुलाबजल डालें।
    18. मुंह में छाले होने पर गुलाब के फूलों का काढ़ा बनाकर कुल्ला करने से छाले दूर होते हैं।
    19. दिल की धड़कन तेज होने पर सूखे हुए गुलाब की पंखुड़ियों का चूर्ण और मिश्री बराबर मात्रा में एक चम्मच सुबह एक चम्मच शाम को दूध के साथ लें। धड़कन सामान्य हो जाती है।
    20. कान दर्द में गुलाब जल की दो-दो बूंदें दोनों कानों में डालने से दर्द में आराम मिलता है।
    21. हाथों-पैरों या शरीर में जलन होने पर चंदन के पाउडर में गुलाब जल मिलाकर जलन वाले स्थान पर लेप करें। थोड़ी देर में जलन शांत हो जाएगी।
    22. पसीने की दुर्गन्ध दूर करने के लिए गुलाब की ताजी पंखुड़ियों को थोड़े से पानी के साथ पीसकर एक गिलास पानी में मिलाकर पूरे शरीर पर उसकी मालिश कर 5-10 मिनट तक छोड़ दें। थोड़ी देर बाद स्नान करने से दुर्गन्ध दूर हो जाती है। इस प्रकार सप्ताह में तीन बार करें।
    23. तैलीय त्वचा के लिए एक एक चम्मच गुलाब जल और निम्बू के रस में पिसा हुआ पुदीना मिलाकर लगाएं.त्वचा में निखार लाने के लिए चोकर में संतरे का रस , गुलाब जल और शहद मिला कर इस पेस्ट को चेहरे पर लगाएं. सूखने पर हलके गर्म पानी से धो लें.
    24. अगर आपकी त्वचा शुष्क है, तो गर्मियों में अपनी त्वचा पर चंदन पाउडर में गुलाब जल मिला कर लगाएं। त्वचा मुलायम होगी और कील मुहांसों से भी राहत मिलेगी।
    25. रोज सुबह चेहरा धोने के बाद एक चम्मच गुलाब जल में नीबू की कुछ बूंदें मिला कर हल्के हाथों से लगा कर धोएं। इससे त्वचा का कालापन कम हो जाएगा। मुहांसों के पुराने दागों पर नियमित गुलाब जल में शहद मिला कर लगाएं। दाग दूर हो जाएंगे।
    26. गुलाब जल एक प्राकृतिक सौंदर्य प्रसाधन है जिसको लगातार लगाने से कई तरह की त्‍वचा संबधी समस्‍याएं खतम हो जाती हैं। सन बर्न या फिर त्‍वचा को साफ करना हो, गुलाब जल काफी फायदेमंद होता है।
    27. पुरूष इसे आफ्टर शेव के रूप में भी प्रयोग कर सकते हैं।
    28. गुलाब जल अरोमा थैरेपी का ही एक हिस्‍सा है। अगर गुलाब जल का प्रयोग किया जाए तो काफी सकारात्‍मक प्रभाव मिलते हैं। तनाव कम होना, अच्‍छी नींद आना, तरो-ताज़ा महसूस करना और सौंदर्य निखरना यह सब गुलाब जल के लगातार उपयोग से ही होता है।
    29. गुलाब जल एक सर्वश्रेष्‍ठ टोनर भी है। यह एक प्राकृतिक अस्ट्रिन्जन्ट होता है इसलिए यह टोनर के रुप में प्रयोग किया जाता है। रोज़ रात को इसे अपने चेहरे पर लगाएं और देखे की आपकी त्‍वचा कुछ ही दिनों में टाइट हो जाएगी और झुर्रियां चली जाएगीं।
  1. इसके अंदर ऐसे तत्व पाए जाते हैं जिसकी वजह से आपके चेहरे के बंद पोर्स साफ हो जाएगें। इन पोर्स में तेल और गंदगी छुपी रहती है जिसकी वजह से चेहरे पर कील और मुंहासे हो जाते हैं। गुलाब जल लगाने से चेहरा की त्वचा स्वस्थ और चमकदार बन जाती है।
  2. यदि आप कहीं तेज़ धूप में जा रहे हों तो त्वचा पर गुलाब जल छिडकने से धूप का असर नहीं पड़ता। गुलाब जल एक कीटाणुनाशक भी है। जिसके प्रयोग से छोटे छोटे कीटाणुओं का नाश हो जाता है। इसको लगाने से धूप की वजह से होने वाले नुक्‍सानों से बचा जा सकता है।

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