Search

गुलकंद के आयुर्वेदिक व औषधीय गुण

गुलकंद का जादू

गुलकंद एक आयुर्वेदिक टॉनिक है। ग्रीष्मकाल की भीषण गर्मी से बचाव करने और शरीर में शीतलता, स्निग्धता तथा तरावट पहुंचाने के लिए आयुर्वेद शास्त्र में कई उपयोगी औषधि-योग बताए गए हैं। इन योगों में से एक उत्तम गुणकारी योग है गुलकन्द, जो कि गुलाब के ताजा फूलों से तैयार किया जाता है और जिसके सेवन से कई प्रकार के लाभ होते हैं।

यूं तो गुलकन्द सभी ऋतुओं में यानी पूरे वर्ष भर तक सेवन किया जा सकता है, फिर भी ग्रीष्म ऋतु में यह विशेष लाभ करने वाला सिद्व होता है। इसमें प्रवाल मिला देने से इसकी गुणवत्ता और बढ़ जाती है। गुलाब के फूल की भीनी-भीनी खुशबू और पंखुड़ियों के औषधीय गुण से भरपूर गुलकंद को नियमित खाने पर पित्त के दोष दूर होते हैं तथा इससे कफ में भी राहत मिलती है। गुलाब से बने गुलकंद में गुलाब का अर्क होता है। जो शरीर को ठंडक पहुंचाता है। यह शरीर को डीहाइड्रेशन से बचाता है और तरोताजा रखता है। पेट को भी ठंडक पहुंचाता है। गुलकंद स्फूर्ति देने वाला एक शीतल टॉनिक है, जो थकान, आलस्य, मांसपेशियों के दर्द और जलन आदि समस्याओं से बचाता है। गर्मियों के मौसम में गुलकंद कई तरह के फायदे पहुंचाता है। हाजमा दुरुस्त रखता है और आलस्य दूर करता है। गुलकंद शरीर के तापमान को नियंत्रित करता है और कब्ज को भी दूर करता है। सुबह-शाम एक-एक चम्मच गुलकंद खाने पर मसूढ़ों में सूजन या खून आने की समस्या दूर हो जाती है। पीरियड के दौरान गुलकंद खाने से पेट दर्द में आराम मिलता है। मुंह का अल्सर दूर करने के लिए भी गुलकंद खाना फायदेमंद होता है।

loading...

गुलकंद बनाने की विधि:-

गुलकंद बनाने की दो तरीके ज्यादा प्रचलन में है

विधि 1

समाग्री: ताजी गुलाब की पंखुडियां, बराबर मात्रा में चीनी, एक छोटा चम्मच पिसी छोटी इलायची तथा पिसा सौंफ

विधि: गुलाब की ताजी व खुली पंखुडियॉं लें (ताजे गुलाब की पंखुड़ियों को अच्छी तरह से धोकर पानी निथार लें। जितनी मात्र में पंखुड़ियां हैं, उतनी मात्र में मिश्री या मोटी चीनी लें। ) अब कांच की बडे मुंह की बोतल लें इसमें थोडी पंखुडियां डालें अब चीनी डालें फिर पंखुडियां फिर चीनी अब एक छोटा चम्मच पिसी छोटी इलायची तथा पिसा सौंफ डालें फिर उपर से पंखुडियां डालें फिर चीनी इस तरह से डब्बा भर जाने तक करते रहें इसे धूप में रख दें आठ दस दिन के लिये बीच- बीच में इसे चलाते रहें चीनी पानी छोडेगी और उसी चीनी पानी में पंखुडियां गलेंगी। (अलग से पानी नहीं डालना है) पंखुडियां पूरी तरह गल जाय यानि सब एक सार हो जाय । लीजिये तैयार हो गया आपका गुलकंद।

विधि 2

गुलकन्द बनाने के लिए गुलाब के ताजा फूल आवश्यक मात्रा में, फूलों से दुगुनी मात्रा (वजन) में शक्कर (चीनी) लेनी चाहिए। फूलों की डण्डी और बीच की केसर हटाकर सिर्फ पंखुडियों को अलग निकाल लें। फिर सब पंखुडियों को शक्कर मिलाकर मसलते हुए एक कलईदार बर्तन या मर्तबान (कांच का बर्तन) में डालते जाएं। पंखुडियों की एक तह जमाने के बाद इसके ऊपर शक्कर की एक तह जमा कर फिर पंखुडियों को शक्कर के साथ मसलते हुए एक तह जमाएं। इस तरह पंखुडियों और शक्कर की तह जमाते जाएं और अन्त में सबसे ऊपर शक्कर की तह जमा कर बर्तन पर ढक्कन रखकर कपड़ मिट्टी से मुंह एयर टाइट बन्द करके, एक मास तक रखे। एक मास बाद इसे खोलें, गुलकन्द तैयार है। एक किलो गुलकन्द में 10 ग्राम प्रवाल पिष्टी मिला दें, तो यह गुलकन्द प्रवाल युक्त हो जाता है।

बाजार में मिलने वाला गुलकन्द, जिसे पान की दुकान वाले पान में डालते है, की अपेक्षा प्रवालयुक्त गुलकन्द अधिक गुणकारी और श्रेष्ठ होता है। और एक और गुलकंद pure gold के नाम से आता है वो भी गुणकारी है इस गुलकन्द के सेवन से कब्ज का नाश होता है, प्यास का शमन होता है, दाह (जलन), पित्त प्रकोप, रक्त पित्त, अम्लपित्त आदि व्याधियां नष्ट होती है। गर्मी के कारण आंखों में जलन व लाली होना, पेशाब में कमी, रूकावट या पीलापन होना, जलन होना, अधिक पसीना आना, त्वचा में खुजली चलना, त्वचा का रंग मलिन होना आदि विकार दूर होते है। मस्तिष्क में शान्ति व तरावट रहती है। स्त्रियों के मासिक धर्म में होने वाला अधिक रक्तस्त्राव (रक्त प्रदर) ठीक होता है। गर्भाशय, आमाशय, मूत्राशय, मलाशय और शुक्राशय की बढ़ी हुई गर्मी का शमन होता है। इसे गर्भवती स्त्री भी सेवन कर सकती है। ग्रीष्मकाल में बच्चे युवा एवं वृद्व, सभी आयु वालों को इस योग का सेवन अवश्य करना चाहिए। यह बना बनाया बाजार  में मिलता है।

गुलकंद के आयुर्वेदिक व औषधीय गुण 

    1. गुलकंद में विटामिन सी, ई और बी अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं। भोजन के बाद गुलकंद खाने से पाचन से जुड़ी समस्याएं दूर हो जाती हैं।
    2. गुलकंद में अच्छी मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट होते हैं। जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं। त्वचा के लिए भी यह बहुत फायदेमंद है। इसमें एंटीबैक्टीरियल गुण हैं, जो त्वचा की समस्याएं मिटाते हैं।
    3. छोटी-छोटी फुंसियां हो रही हों तो गुलकंद का सेवन करें, फुंसियां खत्म हो जाएंगी।
    4. बच्चों के पेट में कीड़े होने पर बाइविडिंग का चूर्ण गुलकंद में मिलाकर एक-एक चम्मच सुबह-शाम 15 दिनों तक लें। पेट के कीड़े खत्म हो जाएंगे।
    5. भोजन के बाद पान में गुलकंद डलवाकर खाना चाहिए। इससे सांस की दुर्गंध दूर हो जाती है और खाना भी हजम हो जाता है।
    6. टीबी से आई शारीरिक कमजोरी में गुलकंद का सेवन करने से लाभ होता है।
    7. गुलकंद को सनाय की पत्ती के साथ सेवन करने से कब्ज दूर होता है।
    8. भोजन के बाद गुलकंद खाने से हाजमा ठीक होता है।
    9. पीरियड के दौरान गुलकंद खाने से पेट दर्द में आराम मिलता है। अधिक रक्तस्त्राव से आराम मिलता है
  1. मुंह का अल्सर दूर करने के लिए भी गुलकंद खाना फायदेमंद होता है।
  2. गुलकंद खाने से स्मरण शक्ति में वृद्धि होती है
  3. शारीरिक कमजोरी को दूर करने के लिए गुलकंद का नियमित सेवन करना चाहिए।
  4. कब्ज दूर करने के लिए नियमित रूप से 2 चम्मच गुलकन्द का सेवन सुबह शाम करने से लाभ मिलता है।

विशेष :- गुलकन्द को 1 या 2 चम्मच मात्रा में दूध या जल के साथ सेवन करें। यह मात्रा सादे गुलकन्द की है, प्रवाल युक्त गुलकन्द की मात्रा इससे आधी रखी जाती है। हालांकि मात्रा थोड़ी कम या ज्यादा हो जाए, तो कोई हर्जा नहीं। इसे सुबह-शाम, दिन में दो बार, सेवन करना चाहिए।

अपील:- प्रिय दोस्तों  यदि आपको ये पोस्ट अच्छा लगा हो या आप हिंदी भाषा को इन्टरनेट पर पोपुलर बनाना चाहते हो तो इसे नीचे दिए बटनों द्वारा Like और Share जरुर करें ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इस पोस्ट को पढ़ सकें हो सकता आपके किसी मित्र या किसी रिश्तेदार को इसकी जरुरत हो और यदि किसी को इस उपचार से मदद मिलती है तो आप को धन्यवाद जरुर देगा.

Read More Health With Kitchen 

Loading...
loading...

Related posts