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खून के थक्के (थ्रौमबोसिस) जमने के कारण और उनके उपचार

(Blood) खून के थक्के (थ्रौमबोसिस) या Blood Clot 

आप लोगों ने बहुत से लोगों से सुना होगा की उनको चक्कर आना आँखों के आगे अँधेरा छा जाना या किसी भी शरीर के किसी अंग में सुन्नपन ये सब शरीर के किसी भी भाग में (Blood) खून के थक्के होने के कारण होता है डीप वेन थ्रोमबोसिस (डीवीटी) बीमारी है शरीर की नसों में (Blood) खून  जमने की. ये ब्लड क्लॉट आम तौर पर पैरों की नसों में पाए जाते हैं. हालांकि ये एक बहुत ही आम बीमारी है लेकिन अनदेखी करने पर थ्रोमबोसिस जानलेवा भी हो सकती है.जब कोई नस काम करना बंद कर देती है तो हमारे शरीर में एक चेन रियेक्शन होता है जिसके अंत में (Blood) खून के थक्के जमने लगते हैं जिससे इंसान का (Blood) खून बहना बंद हो जाता है. जिसे थ्रौमबोसिस नाम की ये बीमारी होती है उसके शरीर में (Blood) खून को जमाने वाले इस किण्वक की मात्रा बहुत अधिक हो जाती है.

ये (Blood) खून के थक्के ज्यादातर  उन लोगों में पाये जाते हैं जिनका सारा दिन किसी एक स्थान या दफ्तर में लगातार बैठकर काम करते हैं। हालत यह है कि भोजन पानी भी अपनी टेबल पर ही करते हैं। बेशक, आप ऐसा काम की अधिकता या फिर वक़्त बचाने के लिए करते हैं, लेकिन यह सब आपकी सेहत को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। अगर आपकी दिनचर्या ऐसी ही है तो आपको इसे फौरन बदलने की जरूरत है। इस तरह की दिनचर्या अपनाने से (Blood) खून का थक्के जमने का खतरा काफी बढ़ जाता है।

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एक नए शोध में यह बात निकलकर सामने आयी है कि जो लोग लगातार 10 घंटे तक काम करते हैं और इस दौरान कोई विराम नहीं लेते तो उनमें (Blood) खून के थक्के जमने का खतरा दोगुना हो जाता है। यह अध्‍ययन काम के बीच लिए जाने वाले विराम के महत्त्‍व को दिखाता है।

अध्‍ययन 21-30 साल की आयु वाले लोगों पर किया गया। अध्‍ययन में शामिल करीब 75 फीसदी लोगों ने काम के दौरान आराम नहीं लेने की बात को स्‍वीकार किया। अध्‍ययनकर्ताओं ने पाया कि काम के दौरान विराम नहीं लेने वाले डीप वीनस थ्राम्‍बोसिस यानी (Blood) खून का थक्‍का जमने की बीमारी की चपेट में आ जाते हैं।

डॉक्टरों का मानना है कि ख़ून का एक थक्का भी अगर टूट कर (Blood) खून में मिल जाए तो वो फेफड़ों के किसी भी नस में ख़ून के बहाव को रोक सकता है, जो इंसान की जान भी ले सकता है. थ्रौमबोसिस के बारे में दिल्ली के आर्टेमिस अस्पताल के डॉक्टर प्रवीण गुप्ता बताते हैं, “(Blood) खून के थक्के जो नसों में जम जाते हैं, वो टूटकर दिमाग, छाती, फेफड़े और शरीर के अन्य हिस्सों में भी जा सकते हैं.

आम तौर पर देखा गया है कि 60 साल से ज़्यादा उम्र, मोटापा, गर्भावस्था या फिर ऑपरेशन के फ़ौरन बाद थ्रौमबोसिस का ख़तरा बढ़ जाता है. शुरुआत में तो इसके लक्षण लोगों को पता भी नहीं चलते. पैरों में हल्का दर्द और प्रभावित हिस्से का लाल पड़ना, ऐसी कई निशानियां हैं जिन्हें लोग आम समझकर अनदेखा करने की ग़लती करते हैं. लेकिन अब सावधान हो जाइए. ये थ्रौमबोसिस भी हो सकता है.

थ्रौमबोसिस के लिए डॉक्टर कई तरह की दवाइयां देते हैं. ये दवाएं शरीर में (Blood) खून के गाढ़ेपन को कम कर उसके बहाव को आसान करते हैं. लेकिन इन दवाओं के साइड इफेक्ट भी होते हैं. अगर किसी स्थिति में आप ये दवा नहीं ले सकते या फिर आपका इलाज करने में ये दवा कामयाब नहीं होती तो डॉक्टर मुख्य नस यानी वीना कावा में छननी लगा देते हैं. ये छननी (Blood) खून के थक्के को दिल या फेफड़ों तक पहुंचने से रोकती है.

(Blood) खून के थक्के के लक्षण

(Blood) खून के थक्के जमने के एक साथ कई लक्षण हो सकता है. आप निम्नलिखित लक्षणों के किसी भी नोटिस, तुरंत चिकित्सक से सलाह लें. आपातकालीन सहायता के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, मस्तिष्क के ऊतकों ऑक्सीजन के अभाव में जल्दी मर जाता है

  • अचानक कमजोरी या चेहरे के सुन्नता, हाथ या पैर, विशेष रूप से शरीर के एक तरफ;
  • अचानक भ्रम की स्थिति;
  • भाषण और समझ के साथ अचानक समस्या;
  • एक या दोनों आंखों में देखकर अचानक मुसीबत;
  • अचानक चक्कर आना, चलने के साथ समस्या, संतुलन या समन्वय का नुकसान;
  • अज्ञात कारण से अचानक तेज सिरदर्द.

(Blood) खून के थक्के रोकने के कुछ उपाय 

उपाय नंबर 1 :-

वैसे तो कहा गया है कि चाय सेहत के लिए हानिकारक होती है। लेकिन हाल ही में हुए एक नए शोध ने इस बात को बताया है कि काली चाय यानी ब्लैक टी सेहत के लिए बेहद फायदेमेंद है यह आपको कई बीमारियों से बचा सकती है। काली चाय में कैफिन की मात्रा काफी कम होती है। जिससे शरीर में (Blood) खून का बहाव अच्छे से होता है। काली चाय में फलोराइड भी होता है जो हड्डियों और मुख के रोगों को दूर करने में फायदेमंद होता है।

ब्लैक टी में मौजूद गुण वजन कम करने में मदद करते हैं। क्योंकि ब्लैक टी में न तो चीनी होती है न ही दूध।
ज्यादातर लोग चाय लेने से परहेज करने लगें हैं लेकिन शोधकर्ताओं के अनुसर दिन में 3 कप चाय का सेवन करने से हार्ट अटैक का 60 प्रतिशत खतरा कम हो जाता है।

डेली एक्सप्रेस समाचार पत्र के अुनसार शोधकर्ताओं का कहना है काली चाय में एंटीआक्सीडेंटस तत्व दिल की बीमारी को रोकने और हार्ट अटैक के खतरे को रोकने में बेहद लाभदायक है। काली चाय (Blood) खून को गाढ़ा बनने से रोकती है जिस वजह से धमनियों में (Blood) खून का थक्का जमने से रूकता है। यह नसों में (Blood) खून के प्रभाव को सरल बनाती है जिस वजह से ब्लडप्रेशर भी नियंत्रित रहता है।

न्यूटीशन बुलेटिन में प्रकाशित हुए इस शोध में यह भी बताया गया है कि काली चाय कई रोगों की रोकथाम करती है।
काली चाय डायबिटीज के खतरे से भी बचाती है। यह टाइप 2 के मधुमेह के खतरे को खत्म करती है। अभी इस बात का शोध होना बाकी है कि कितनी मात्रा में इंसान काली चाय का सेवन करे। अभी तक तो रोज 3 कप काली चाय पीना आपके दिल के लिए बेहद अच्छा है।

यह आपके मेटाबोल्जिम को बढ़ाती है। काली चाय पीने से आप 70 से 80 अतरिक्त कैलोरी को जला सकते हैं। इसलिए वजन कम करने में यह सहायक है।

उपाय नंबर 2 

अगर आप रोजाना एक सेब या संतरा खाते हैं तो आपको ब्लड क्लॉट यानी (Blood) खून के थक्के जमने की समस्या से छुटकारा मिल सकता है।

हावर्ड मेडिकल स्कूल की एक टीम ने पाया है कि सेब, संतरा और प्याज में ‘रूटिन’ नामक रसायन धमनियों और शिराओं में (Blood) खून के थक्के जमने से रोक सकता है। उनका मानना है कि ‘रूटिन’ ब्लैक और ग्रीन टी में भी हो सकता है। इसका इस्तेमाल भविष्य में दिल का दौरा पडऩे से बचाने के लिए इलाज के तौर पर हो सकता है।

टीम ने शोध में पाया कि रसायन  ने उस खतरनाक एंजाइम को रोकने में मदद की, जिसकी (Blood) खून के थक्के जमाने में भूमिका होती है। प्रोटीन डाइसल्फाइड आइसोमरेज (पीडीआई) नाम का यह एंजाइम बेहद तेजी से रिलीज होता है, जब धमनियों और शिराओं में (Blood) खून के थक्के जमते  है।

वैज्ञानिकों ने कंप्यूटरों पर वैज्ञानिक मॉडलों का इस्तेमाल करते हुए पीडीआई को रोकने के लिए रूटिन समेत 500 अलग-अलग रसायनों की क्षमता की जांच की। उन्होंने रूटिन को सबसे ज्यादा असरदार पाया।

(Blood) खून के थक्के की रोकथाम

(Blood) खून के थक्के जमने की संभावना को कम करने के लिए, इन चरणों का पालन करें::

  • नियमित रूप से व्यायाम करें;
  • अधिक फल खाओ, सब्जियों और अनाज. नमक और वसा की अपनी सीमा के सेवन;
  • धूम्रपान छोड़ने;
  • केवल कम मात्रा में शराब पीना (50-100 दिन प्रति ग्राम);
  • एक स्वस्थ वजन बनाए रखें;
  • अक्सर ब्लड प्रेशर की जांच. और डॉक्टर की सिफारिशों का पालन;
  • कम खुराक एस्पिरिन लेने (50-325 दिन प्रति मिलीग्राम), डॉक्टर कहते हैं कि यह सुरक्षित है;
  • जीर्ण रोगों पर नियंत्रण – उच्च कोलेस्ट्रॉल और मधुमेह;

स्टैटिन के उपयोग की संभावना के बारे में अपने चिकित्सक से पूछें. ये दवाएँ (Blood) खून के थक्के जमने को रोकने में मदद कर सकते हैं;

तो दोस्तों अगर आप इस बीमारी के शिकार नहीं होना चाहते तो त्याग दीजिए आराम की ज़िंदगी, छोड़ दीजिए गर्म रजाई और रोज़ सवेरे लगाइए दौड़. दफ्तर में अगर आपको ज़्यादा लंबे समय के लिए बैठना पड़ता है तो कोशिश करें कि थोड़ी थोड़ी देर में चलें या फिर बैठे बैठे ही पांव को फैलाते रहें. इससे पांव में (Blood) खून का बहाव सामान्य रहेगा और थ्रौमबोसिस के ख़तरे को रोका जा सकता है .

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