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खर्राटे से होने वाली बीमारी और उसके उपचार

खर्राटे (Snoring) से होने वाली बीमारी और उसके उपचार 

खर्राटे खुद आपकी नींद भी उड़ा सकते हैं। अक्‍सर हम अपने घर के सदस्यों से सुनते हैं कि तुम्हारे खर्राटों ने मेरी नींद खराब कर दी। अगर आप भी तेज खर्राटे लेते हैं तो सावधान हो जाइए ! हाल ही में ताइवान की मेडिकल यूनिवर्सिटी में हुए शोध के अनुसार जो लोग सोते वक्त तेज खर्राटे लेते हैं, उनमें हड्डियों की घातक बीमारी र्यूमेटायड ऑर्थराइटिस होने का खतरा दोगुना बढ़ जाता है। स्वीडन के करोलींस्का इस्टीटय़ूट में हुए अध्ययन के अनुसार अगर आप हफ्ते में तीन बार या उससे अधिक बीयर का सेवन करते हैं तो भी इस बीमारी की चपेट में आने की आशंका बढ़ जाती है।

रयूमेटाइड ऑर्थराइटिस रोगी को पंगु बना बिस्तर पर ला देती है। खास बात यह है कि यह बीमारी अधिकतर युवाओं व मध्य आयु के लोगों को अपना शिकार बनाती है। यह बीमारी 20 से 50 साल के लोगों में ज्यादा पाई जाती है और अधिकतर महिलाओं को होती है। रयूमेटायड ऑर्थराइटिस की वजह से जोड़ ढीले, असामान्य, कम गतिशील हो जाते हैं और उनमें ताकत समाप्त हो जाती है।

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एक अनुमान के अनुसार भारत में रयूमेटायड अर्थराइटिस से लगभग 70 लाख लोग पीड़ित हैं। चिंता की बात यह कि इनमें से अधिकतर लोगों को बहुत देर से चलता है कि वे इस असहनीय बीमारी की चपेट में आ चुके हैं। इसका मुख्य कारण जानकारी का अभाव है।

यह एक ऑटो इम्यून बीमारी है जिसमें रोगी के शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली ही उसके शरीर को नुकसान पहुंचाने लगती है। इस तरह शरीर में कुछ ऐसे एंटीजन पैदा होते हैं जो कई हानिकारक रसायन जैसे साइटोकाइनिन्स उत्पन्न करते हैं।

इन रसायनों के कारण जोड़ों में पाया जाने वाला द्रव्य साइनोवियल सूखने लगता है तथा उनका आकार बिगड़ने लगता है, प्रभावित जोड़ के आसपास की त्वचा लाल व गर्म हो जाती है और इसके साथ-साथ असहनीय दर्द भी उत्पन्न होता है।

कुछ लोग सोते समय खर्राटा लेते हैं। इस कारण वे मजाक के पात्र भी बनते हैं। लेकिन यह मजाक की बात नहीं है, बल्कि आपके लिए किसी बड़ी बीमारी का कारण भी बन सकता है।

सोते समय खर्राटा लेने वालों का मजाक बनाया जाता है, जो असल में मजाक बनाने की बात नहीं बल्कि गंभीर समस्या है। इसे लोग गंभीरता से नहीं लेते हैं जबकि सच्चाई तो यह है कि यदि इसका तुरंत इलाज न कराया गया तो सीधा दिल पर असर कर सकता है। खर्राटे लेने का अर्थ है फेफड़े में हाइपरटेंशन होना। यानी ठीक से सांस न ले पाना। सांस का सही अनुपात न होने की वजह से खून में ऑक्सीजन का हिसाब बिगड़ जाता है। इसका सीधा असर दिल पर होता है। यही वजह है कि कई बार कार्डियक अटैक नींद के दौरान ही आ जाता है।

खर्राटे होने के कारण
हमारा गला अंदर से खास तरह की मांसपेशियों से घिरा होता है, जो बोलने, सांस लेने और भोजन के समय हवा को नियंत्रित करता है। सोते समय यह मांसपेशी निष्क्रिय हो जाती है। इससे गर्दन थोड़ी संकीर्ण हो जाती है। अधिकांश लोगों को इस संकीर्णता से कोई समस्या नहीं होती। लेकिन कुछ में यही संकीर्णता खर्राटे की वजह बन जाती है।

खर्राटे की बीमारी को कैसे पहचानें
महिलाओं का कॉलर साइज यदि 16 इंच से ज्यादा और पुरुषों का 17 इंच से ज्यादा हो तो इन लोगों को स्लीप एप्नीया की समस्या हो सकती है। उच्च रक्तचाप वालों को यह बीमारी हो सकती है।

खर्राटे की समस्या
नींद में खर्राटा लेने की समस्या को अब्सट्रक्टिव स्लीप एप्नीया(ओएसओ) कहते हैं। इसमें सांस में ऑक्सीजन की कमी और कार्बनडाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ जाती है। दिल को इसका सही अनुपात नहीं मिल पाता। जिनके दिल में अवरोध है, उनके लिए ओएसओ की गंभीर समस्या का संबंध हार्ट अटैक से है। ओएसओ की गंभीर समस्या को ‘अब्सट्रक्टिव एप्नीया’ कहते हैं। इसकी मामूली समस्या को ‘हाइपोप्नीया’ कहते हैं। हालांकि इसमें मरीज जब जाग जाता है तो हवा को नियंत्रित करने वाली ऊपरी मांसपेशी खुल जाती है। एक बार हवा के आने-जाने के लिए रास्ता खुलने पर मरीज को गहरी सांस लेनी चाहिए, जिससे खून में ऑक्सीजन की सही मात्र को दोबारा हासिल किया जा सके।

खर्राटे के लक्षण
अधिकतर लोगों को इस बारे में पता नहीं होता। ये लोग दिन भर आलस महसूस करते हैं। इन्हें ताजगी का अहसास नहीं होता। सोते समय बेचैनी महसूसना, सांस के अवरुद्ध होने से नींद टूटना, सुबह उठने के बाद सिरदर्द, गला सूखना, बार-बार पेशाब जाना, उठने के बाद भी अच्छा न महसूसना, कुछ भी ठीक से याद न रहना आदि इसके प्रमुख लक्षण हैं।

निशाने पर कौन
खर्राटा होने की कोई उम्र निर्धारित नहीं है। 40 की उम्र से अधिक लोगों को स्लीप एप्नीया होने की आशंका अधिक रहती है। मोटापा जितना अधिक होगा, स्लीप एप्नीया की आशंका उतनी अधिक रहेगी। ज्यादा दवा लेने या नशा करने वालों में खर्राटे की समस्या काफी गंभीर हो सकती है। यदि आपने ध्यान दिया होगा तो पाएंगे कि शराब का सेवन करके सोने वाले अकसर खर्राटा लेते हुए पाए जाते हैं। संभव है कि वे यूं रोजाना खर्राटा न भी लेते हों लेकिन शराब के सेवन वाले दिन वे खर्राटा लेते पाए जाते हैं।

खर्राटे के  फैक्ट्स
30-60 साल के लोगों में आदतन खर्राटा 44 फीसद पुरुषों और 28 फीसदी महिलाओं में देखा जाता है।
नींद में बाधा के बिना भी खर्राटा लिया जा सकता है।

अनियंत्रित खर्राटा उच्च रक्तचाप की तरफ ले जा सकता है और दिल का रोगी बना सकता है। इससे पैरालिसिस होने की भी आशंका हो सकती है।
खर्राटा और अचानक होने वाली मृत्यु का आपस में संबंध है।
खर्राटे हैं कई बीमारियों का संकेत
नींद में लगातार अनियमितता बनी रहने से पीड़ित व्यक्ति अगले दिन तनावग्रस्त महसूस करता है और लगातार सिरदर्द की भी शिकायत रहती है। वहीं इससे स्मरणशक्ति कमजोर होने की आशंका भी बढ़ जाती है।

विशेषज्ञ कहते हैं कि खर्राटों की वजह से नींद पूरी न हो पाने से कई स्वास्थ्य समस्याओं को न्यौता मिलता है। आइए जानते हैं कुछ ऐसी ही बीमारियों के बारे में..

हाई ब्लड प्रेशर

स्लिप एप्निया से पीड़ित व्यक्ति को नींद में सांस लेने में होने वाली परेशानियों के चलते शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती है। इससे अनावश्यक तनाव की स्थिति बनती है और पीड़ित हाइपरटेंशन यानी हाई बीपी का शिकार हो जाता है।

ऐसे में शरीर का सिंपेथेटिक नर्वस सिस्टम (एसएनएस) कमजोर पड़ने लगता है। इसकी मुख्य भूमिका तनाव को नियंत्रित करने में सहायक नोराड्रेनेलिन हार्मोन को सक्रिय करने की होती है। ऐसा नहीं हो पाने से व्यक्ति के तनावग्रस्त होने की आशंका बढ़ जाती है।

हृदय रोग

एक शोध में पाया गया है कि स्लिप एप्निया से पीड़ित 50 फीसदी मरीजों को हार्ट अटैक रात के समय या सुबह के समय ही आता है, क्योंकि वे नींद में ठीक प्रकार से सांस नहीं ले पाते हैं। इससे ऑक्सीजन की पूर्ति ठीक ढंग से नहीं हो पाती है और शरीर में कार्बन डाईऑक्साइड की मात्रा बढ़ने लगती है। ऐसे में रक्त वाहिकाओं पर अनावश्यक दबाव पड़ता है, जिससे हृदय रोगों या स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।

टाइप 2 डायबिटिज

स्लिप एप्निया और टाइप 2 डायबिटिज के बीच गहरा संबंध है। टाइप 2 डायबिटिज से पीड़ित 80 फीसदी लोगों को स्लिप एप्निया की समस्या होती ही है। विशेषज्ञ कहते हैं कि जब व्यक्ति चैन की नींद सोता है, तभी उसका शरीर इंसुलिन का अवशोषण ठीक प्रकार से कर पाता है। नींद की कमी वास्तव में इंसुलिन प्रतिरोधक का काम करती है, जिससे डायबिटिज का खतरा बढ़ जाता है।

अस्थमा

जिन लोगों को अस्थमा की समस्या होती है, उनके नींद संबंधित गड़बड़ियों या स्लिप एप्निया से पीड़ित होने की आशंका भी अधिक होती है। यूनिवर्सिटी ऑफ सिनसिनाटी के चिल्ड्रन्स मेडिकल सेंटर में अस्थमा से पीड़ित महिलाओं पर किए गए शोध में सामने आया है कि अस्थमा होने पर स्लीप एप्निया का खतरा दो गुना तक बढ़ जाता है। वहीं अस्थमा के जो मरीज दिन के समय नींद लेते हैं, उनकी रात की नींद अक्सर खराब होती ही है।

वजन बढ़ना

स्लिप एप्निया से पीड़ित व्यक्ति के एंडोक्राइन सिस्टम पर नकारात्मक असर पड़ता है। साथ ही ग्रेहलीन नामक हार्मोन की सक्रियता बढ़ने से पीड़ित का मन काबरेहाइड्रेटयुक्त और मीठे खाद्य पदार्थो को खाने का अधिक करता है।

भोजन की इन गड़बड़ियों के चलते नींद का पैटर्न भी गड़बड़ होने लगता है। ऐसे में पीड़ित के शरीर में एक्सरसाइज के लिए जरूरी एनर्जी नहीं बचती है और अतिरिक्त कैलोरी फैट में तब्दील हो जाती है, जिससे वजन बढ़ने की समस्या होने लगती है

खर्राटे भगाने के तरीके

वजन कम करना- नींद के दौरान आवाज के साथ सांस लेना खर्राटा है. यह एक आम समस्या है जो हर किसी को हो जाती है चाहे वह किसी भी उम्र का हो. करीब 9 करोड़ अमेरिकी खर्राटों के मारे हैं. बढ़ती उम्र के साथ खर्राटे की समस्या और गंभीर हो जाती है. वजन कम करने से खर्राटे की समस्या से भी मुक्ति मिल सकती है.

शराब से परहेज- सोने से पहले शराब और अन्य नशीली चीजों के सेवन से बचना चाहिए. ऐसे पदार्थ गले में मांसपेशियों को आराम देते हैं और सांस लेने में अड़चन पैदा करते हैं. महिलाओं को एक ड्रिंक और पुरुषों को दो ड्रिंक से ज्यादा लेने से बचना चाहिए.

नियमित कसरत- कसरत करने के तो कई फायदे हैं. नियमित कसरत से आप खर्राटे की समस्या से निजात पा सकते हैं. साथ ही नियत समय पर सोने की आदत डालें.

सिगरेट छोड़ें- वैसे भी सिगरेट पीना अच्छी आदत नहीं है. सिगरेट भी खर्राटे का कारण हो सकते हैं. सिगरेट का धुआं नैजल और फेफड़ों को अवरोध पहुंचाता है जिस कारण खर्राटे की समस्या पैदा होती है.

दो घंटे पहले– भारी भोजन और कैफीन उत्पादों का सेवन किसी भी स्थिति में खाने से दो घंटे पहले नहीं करना चाहिए. दूध से बने उत्पाद और सोया दूध का सेवन सोने के पहले नहीं करना चाहिए.

सोने का तरीका- सोने के तरीके में बदलाव करके खर्राटे को काबू किया जा सकता है. सीधे सोने के बजाय करवट लेकर सोएं. इससे जीभ हवा को रोकती नहीं और इस वजह से होने वाला खर्राटा बंद हो जाता है. ऐसे तकिए भी मिलते हैं जो गर्दन की मांसपेशियों को मुड़ने से बचाते हैं. इससे खर्राटे कम हो सकते हैं.

सोते समय अगर सिर को थोड़ा ऊंचा करके सोया जाए तो भी खर्राटे की समस्‍या से बचा जा सकता है।

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