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काला चना :- गरीबों का बादाम

काला चना गरीबों का बादाम

काला चना :- सर्दियों में रोजाना 50 ग्राम चना खाना बादाम से ज्यादा लाभकारी होता है। घोड़े की ताकत से तो आप समझ ही सकते हैं कि उसका भोजन चना कितना ताकतवर होता है । कहावत है चना खाओ घोड़े सी ताकत पाओ !

भारत में रहने वाला हर शख्‍स काले चने के बारे में जानता है। दादा-परदादा और उनके भी दादा परदादा के जमाने से यह बात कही सुनी जा रही है कि यदि आदमी और घोड़ा चना खाता रहे तो कभी बूढ़े नहीं होते.। चने को गरीबों का बादाम कहा जाता है, मेहनकश की खुराक का अहम हिस्‍सा रहा है चना। यही वो चीज है जो घोड़े को घोड़ा और इंसान को पहलवान बनाती है। कहा जाता है जंग के वक्‍त सैनिकों को चने और गुड़ देकर मोर्चे पर भेजा जाता था। चने के कई किस्में आती हैं, काला,पीला,छोटे चने,काबुली,सफेद जो मोटे होते हैं।| चने की दो प्रजातियां होती है –

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1-काला चना

2-काबुली चना |

वैज्ञानिक भाषा में बात करें तो चने में प्रोटीन, फाइबर, विटामिन, आयरन और कैल्शियम अच्‍छी खासी मात्रा में होता है। सर्दियों में रोजाना 50 ग्राम चना खाना बादाम से ज्यादा लाभकारी होता है। घोड़े की ताकत से तो आप समझ ही सकते हैं कि उसका भोजन चना कितना ताकतवर होता है । कहावत है चना खाओ घोड़े सी ताकत पाओ

काला चना आयरन का सबसे सस्ता स्रोत है। 100 ग्राम में करीब 3 एमजी आयरन होता है। यह आपकी रोज की जरूरत का करीब 20 फीसदी है। यही नहीं चने में पोटेशियम, मैगनीशियम और कैल्शियम की भी अच्छी मात्रा होती है।

चने को दस्तावर कहा जाता है। कब्ज के शिकार लोगों के लिए यह अच्छी चीज है। इसमें ढेर सारा फाइबर होता है जो आपको पेट साफ करने में मदद करता है। फाइबर आपकी आंतों को मांझने का काम भी करता है। काला चना में कई तरह के मिनरल्स और विटामिन होते हैं, जो पेट के मूवमेंट को बिगड़ने नहीं देते। सौ ग्राम काले चने में करीब 20 ग्राम फाइबर होता है। यह आपकी रोज की जरूरत का 80 फीसदी है। बॉडी बिल्डिंग में बहुत कुछ ऐसा खाना पड़ता है जो पेट के लिए ठीक नहीं होता। पेट की सुरक्षा की जिम्मेदारी कुछ हद तक आप चने पर छोड़ सकते हैं।

काला चना दो तरह से वेट कम करने में मदद करता है। एक तो उसमें फाइबर खूब होता है और दूसरा उसे खाने से लंबे समय तक पेट भरा-भरा महसूस करता है। जो लोग वेट कम करने की कोशिश कर रहे हैं वो अपनी डाइट में कच्‍चे, भुने या अंकुरित चने जरूर शामिल करें। वैसे अंकुरित चने में फाइबर और बढ़ जाता है।

सर्दियों में चने के आटे का हलवा कुछ दिनों तक नियमित रूप से सेवन करना चाहिए। यह हलवा वात से होने वाले रोगों में व अस्थमा में फायदेमंद होता है।

डायबिटीज के मरीज पूरे इत्मेनान से चने को अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं। इसकी एक वजह यह है कि यह काफी धीमी रफ्तार से ग्लूकोज को बॉडी में रिलीज करता है। इससे अचानक बॉडी का शुगर लेवल नहीं बढ़ता।

काला चना किसी भी रूप में खाने वाले की सांस नहीं फूलती !

काला चना शाकाहारी प्रोटीन और कैलोरी का सस्ता और उम्दा स्रोत है। 100 ग्राम चने में करीब 15 ग्राम प्रोटीन और करीब 347 कैलोरी होती है। कसरत करने वालों को ताकत के लिए कैलोरी और बदन में हुई टूट फूट की मरम्‍मत व मसल्‍स बनाने के लिए प्रोटीन की बहुत जरूरत होती है। इसमें कुछ तो ऐसी बात है कि महान पहलवान दारा सिंह जी भी इसके शोकीन थे।

अगर आप शनि को प्रसन्न करना चाहते हैं तो शुक्रवार की रात काला चना पानी में भिगोएं। शनिवार को वह काला चना, जला हुआ कोयला, हल्दी और लोहे का एक टुकड़ा लें और एक काले कपड़े में उन्हें एक साथ बांध लें। पोटली को बहते हुए पानी में फेंके जिसमें मछलियां हों। इसे प्रक्रिया को एक साल तक हर शनिवार दोहराएं। यह शनि के अशुभ प्रभाव के कारण उत्पन्न हुई बाधाओं को समाप्त कर देगा।

याद रखें – चने को पचाना आसान नहीं होता। अगर भिगोए हुए कच्चे चने खा रहे हैं तो उसे खूब चबाकर खाएं। ये मानकर चलें कि उसे जितना आपने अपने दांतों से पीस दिया वह हजम होगा बाकी बाहर। वैसे उबाल कर खाएंगे तो उसे पचाना जरा आसान हो जाएगा। उबालते वक्त ध्यान रखें कि उसमें उतना ही पानी डालें, जिसमें वो उबल जाए और पानी फेंकना न पड़े। जिस कटोरे में चने उबालें उसमें इतना पानी डालें कि चने का सिर हल्का-हल्का पानी के ऊपर दिखता रहे। एक दो बार पकाने पर आपको बिल्कुल सही अंदाजा हो जाएगा।

इसे लजीज बनाना आपके हाथ में है। एक कटोरी उबले चने में बारीक कटा प्याज, हरी मिर्च, धनिया और नमक डालें। दो चार बूंद सरसों का तेल और फिर नींबू निचोड़ दें। खाकर तबीयत खुश हो जाएगी। अगर चने से गैस बनती है तो नमक के साथ भुनी हिंग का पाउडर भी डालें।

सौ ग्राम चने में फॉस्‍फोरस :- 27 फीसदी, कैलोरी – 347, फैट – 5 ग्राम, फाइबर – 20 ग्राम, प्रोटीन – 15 ग्राम, आयरन – रोज की जरूरत का 20 फीसदी, विटामिन ए – 63 फीसदी (रोज की जरूरत का), कैल्शियम – 40 फीसदी (रोज की जरूरत का)

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