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कद्दू (Pumpkin) के आयुर्वेदिक और औषधीय गुण

कद्दू (Kaddu) के गुण

कद्दू हमारे घर में बनाई जाने वाली आम सब्‍जी है लेकिन हम फिर भी इसे अपनी फेवरेट सब्‍जी के रूप में उल्‍लेख नहीं करते। यह बहुत ही स्‍वास्‍थ्‍य वर्धक सब्‍जी है जिसे हम नजरअंदाज कर देते हैं। लोगों में यह भी गलत धारणा है कि कद्दू मीठा होता है इसलिये इसे मधुमेह रोगी नहीं खा सकते। यह बात बिल्‍कुल गलत है। शरीर के इन्‍सुलिन लेवल को बढाना कद्दू का काम होता है. कद्दू का सेवन, डायबटीज के रोग में फायदेमंद होता है।

Kaddu को सब्जी एवं अनेक प्रकार के व्यंजन बनाने के काम में लिया जाता है। यह अनेक पौष्टिक गुणों से भरपूर फल है, जिसका आयुर्वेदीय चिकित्सा पद्धति में कई रोगों की चिकित्सा करने में प्रयोग किया जाता है। हिन्दी में इसको काशीफल, कद्दू, रामकोहला, तथा संस्कृत में कुष्मांड, पुष्पफल, वृहत फल, वल्लीफल कहते हैं।

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Kaddu में मुख्य रूप से बीटा केरोटीन पाया जाता है, जिससे विटामिन ए मिलता है। पीले और संतरी Kaddu में केरोटीन की मात्रा अपेक्षाकृत ज्यादा होती है। बीटा केरोटीन एंटीऑक्सीडेंट होता है जो शरीर में फ्री रैडिकल से निपटने में मदद करता है। Kaddu व इसके बीज विटामिन सी और ई, आयरन, कैलशियम मैग्नीशियम, फॉसफोरस, पोटैशियम, जिंक, प्रोटीन और फाइबर आदि के भी अच्छे स्रोत होते हैं। इसमें श्वेतसार, कुकुर्बिटान नामक क्षाराभ, एकतिक्तराल, प्रोटीन-मायोसिन, वाईटेलिन शर्करा क्षार आदि पाए जाते हैं।
आहार विशेषज्ञों का कहना है कि Kaddu हृदयरोगियों के लिए अत्यंत लाभदायक है। यह कोलेस्ट्राल कम करता है, ठंडक पहुंचाने वाला और फायदेमंद होता है।
कद्दू  बलवर्धक है, रक्त एवं पेट साफ करता है, पित्त व वायु विकार दूर करता है और मस्तिष्क के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है। प्रयोगों में पाया गया है कि Kaddu के छिलके में भी एंटीबैक्टीरिया तत्व होता है जो संक्रमण फैलाने वाले जीवाणुओं से रक्षा करता है। कद्दू के बीज भी आयरन, जिंक, पोटेशियम और मैग्नीशियम के अच्छे स्रोत हैं। इसमे खूब रेशा यानी की फाइबर होता है जिससे पेट हमेशा साफ रहता है। शायद इन्हीं खूबियों के कारण कद्दू को प्राचीन काल से ही गुणों की खान माना जाता रहा है।  यह खून में शर्करा की मात्रा को नियंत्रित करने में सहायक होता है और अग्नयाशय को भी सक्रिय करता है। इसी वजह से चिकित्सक मधुमेह के रोगियों को Kaddu के सेवन की सलाह देते हैं।

कद्दू के आयुर्वेदिक प्रयोग-

  1. अग्नि से जल जाने पर (अग्निदग्ध) इसके पत्तों का रस निकालकर लगाने से काफी लाभ मिलता है
  2. उन्माद,मिर्गी आदि मानसिक रोगों में यह अच्छा लाभ करता है तथा स्मरण शक्ति  व मस्तिष्क व ह्रदय की दुर्बलता को दूर करता है।
  3. मानस रोगों में पका Kaddu विशेष लाभदायक होता है। यह शरीर को पुष्ट बनाता है।
  4. यह उरःक्षत, रक्तपित्त, मूत्र, कृच्छ, मूत्राघात, अश्मरी, राजयक्ष्मा क्षय आदि में भी सहायक रूप से लाभ करता है।
  5. शरीर में जलन की शान्ति के लिए इसके बीजों को पीसकर मिश्री मिलाकर ठण्डाई के रूप में प्रयोग करते हैं।
  6. गर्मियों में इसका अवलेह व मुरब्बा भी प्रयोग किया जाता है तथा इसके अनेक व्यंजन, बर्फी, खीर, हलवा, रायता, पकौड़े आदि के रूप में भी प्रयोग करते हैं।

कद्दू के घरेलू नुस्खे-

  • Kaddu लंबे समय के बुखार में असरकारी होता है। इससे बदन की हरारत या उसका आभास दूर होता है।
  • आहार विशेषज्ञों का कहना है कि Kaddu हृदयरोगियों के लिए अत्यंत लाभदायक है। यह कोलेस्ट्राल कम करता है, ठंडक पहुंचाने वाला और मूत्रवर्धक होता है।
  •  मधुमेह रोगियों के लिये- Kaddu रक्त में शर्करा की मात्रा को नियंत्रित करता है और अग्न्याशय को सक्रिय करता है। इसी कारण चिकित्सक मधुमेह रोगियों को Kaddu खाने की सलाह देते हैं। इसका रस भी स्वास्थ्यवर्धक माना गया है।
  • लोहे की कमी या एनीमिया में कद्दू लाभदायक सिद्ध होता है।
  • इसमें पाया जाने वाला विटामिन ए बहुत ही लाभकारी होता है। इससे शरीर में एंटीऑक्सिडेंट की मात्रा में इजाफा होता है। ऐसा होने से आपकी स्किन और बालों की सेहत बेहतर रहती है।
  • प्रयोगों में पाया गया है कि कद्दू के छिलके में भी एंटीबैक्टीरिया तत्व होता है जो संक्रमण फैलाने वाले जीवाणुओं से रक्षा करता है। शायद इन्हीं खूबियों की वजह से कद्दू को प्राचीन काल से ही गुणों की खान माना जाता रहा है।
  • कद्दू मस्तिष्क को बल व शांति प्रदान करता है। यह निद्राजनक है। इसलिए अनेक मनोविकार जैसे मिर्गी(एपिलेप्सी), अनिद्रा, गुस्सा, डिप्रेशन, असंतुलन तथा मस्तिष्क की दुर्बलता में अत्यन्त लाभदायी है। इससे बुद्धि की क्षमता बढ़ती है। चंचलता, चिड़चिड़ापन, अनिद्रा आदि दूर होकर मन शांत हो जाता है।
  • कुम्हड़ा रक्तवाहिनियों व हृदय की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है और अच्छे रक्त का निर्माण करता है। आंतरिक जलन, अत्यधिक प्यास, एसिडिटी, पुराना बुखार आदि में कद्दू का रस और सब्जी दोनो उपयोगी हैं।

कद्दू के बीज भी बहुत गुणकारी होते हैं। कद्दू व इसके बीज विटामिन सी और ई, आयरन, कैलशियम मैग्नीशियम, फॉसफोरस, पोटैशियम, जिंक, प्रोटीन और फाइबर आदि के भी अच्छे स्रोत होते हैं। यह बलवर्धक, रक्त एवं पेट साफ करता है, पित्त व वायु विकार दूर करता है और मस्तिष्क के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है। प्रयोगों में पाया गया है कि कद्दू के छिलके में भी एंटीबैक्टीरिया तत्व होता है जो संक्रमण फैलाने वाले जीवाणुओं से रक्षा करता है।

अनिद्रा, चिंता और तनाव (डिप्रेशन) :- कद्दू के एक ग्राम बीजों में करीब 22 मिलीग्राम ट्रिप्टोफान प्रोटीन पाया जाता है, जिसे नींद का कारक भी माना जाता है।

हृदय स्वास्थ्य के लिए अच्छा :- कद्दू के बीज मिनरल मैग्‍नीशियम का एक समृद्ध स्रोत है, जो दिल के उपचार में मदद करता है।

रक्त शर्करा पर नियंत्रण :- इस चमत्कारिक बीज में सुपाच्‍य प्रोटीन होता है। जो शरीर में रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करता है और अग्न्याशय को सक्रिय करता है। इसी कारण मधुमेह रोगियों को कद्दू के बीज खाने की सलाह दी जाती हैं।

प्रोस्टेटिक हाइपरट्रॉफी का खतरा कम करें :- कद्दू के बीज के तेल में ओमेगा-3 बहुत अधिक मात्रा में होता है जो प्रोस्टेटिक अतिवृद्धि यानी बीपीएच के जोखिम को कम करने में मदद करता है।

एनर्जी देता है : – जिन लोगों में एनर्जी का लेवल कम होता है, उन लोगों के लिए कद्दू के बीज रामबाण की तरह काम करते हैं। इन बीजों के सेवन शरीर में रक्त और ऊर्जा के स्तर के निर्माण में मदद करता है।

एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण की मौजूदगी :- कद्दू को प्राचीन काल से ही गुणों की खान माना जाता रहा है। कुछ अध्‍ययनों से यह बात साबित हुई है कि कद्दू के बीजों में भरपूर मात्रा में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण दर्द, बुखार, सूजन और जकड़न में इस्‍तेमाल होने वाली दवा (इंडोमेथासिन) के सामान ही प्रभावी होती है।

कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करती है :- बुरे कोलेस्‍ट्रॉल को कम करने के लिए कद्दू के बीज फायदेमंद होते है। स्टेरॉल्‍स और फि‍टोस्टेरॉल नामक तत्‍व से भरपूर कद्दू के बीज शरीर में कोलेस्‍ट्रॉल के स्‍तर को कम करने में मदद करते है।

फाइबर का अच्छा स्रोत :- Kaddu के बीज रेशा यानी फाइबर से उच्‍च होते है। जो शरीर में फाइबर की आवश्‍यकता को पूरा करता है। साथ ही इसके सेवन से कब्‍ज की समस्‍या नहीं होती और पेट हमेशा साफ रहता है।

एसिटिडी का इलाज :- Kaddu के बीज में शरीर के पीएच को अल्कलाइजिंग करता है जिससे पेट में एसिड के गठन को रोकता है। एसिड की समस्‍या से बचने के लिए इसे अपने आहार में शामिल करें। इसे आप सब्जी, सूप, सलाद, जिसमें चाहे और जैसे चाहे खा सकते हैं।

कद्दू में सेचुरेटेड फैट नहीं पाया जाता। इससे शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम बनी रहती और दिल सेहतमंद रहता है। इसमें पाए जाने वाले डायटरी फाइबर से पेट की बीमारियों में आराम मिलता है।

इसमें पाया जाने वाला विटामिन ए बहुत ही लाभकारी होता है। इससे शरीर में एंटीऑक्सिडेंट की मात्रा में इजाफा होता है। ऐसा होने से आपकी स्किन और बालों की सेहत बेहतर रहती है।

कद्दू में जीआ स्कैनटिन नामक एंटीऑक्सिडेंट पाया जाता है। यह अल्ट्रा वायलेट किरणों से होने वाले नुकसान से बचाता है। इससे त्वचा के नए सेल्स बनने लगते हैं।

नोट :- सप्ताह में कम से कम दो बार कद्दू जरूर खाएं। सलाद के रूप में न खा पाएं तो इसकी सब्जी बनाकर खाना भी लाभ देगा

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