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कटहल/Jackfruit के स्‍वास्‍थ्‍य लाभ

कटहल के आयुर्वेदिक और औषधीय गुण

कटहल के पके और कच्चे फल बिकते हुए दिखाई देते हैं लेकिन अन्य सब्जियों और फलों की तुलना में कटहल के खरीददार कम ही दिखते हैं। आमतौर पर लोग इसे सिर्फ सब्जी के तौर पर इस्तमाल करते हैं किंतु ये बात कम ही लोग जानते हैं कि कटहल में कई औषधीय गुण पाए जाते हैं। ग्रामीण अँचलों में सब्जी के तौर पर खाया जाने वाला kathal कई तरह के औषधीय गुणों से भरपूर है। कटहल का वानस्पतिक नाम आर्टोकार्पस हेटेरोफि़ल्लस है। kathal  के फ़लों में कई महत्वपूर्ण प्रोटीन्स, कार्बोहाईड्रेड्स के अलावा विटामिन्स भी पाए जाते हैं।

सब्जी के तौर पर खाने के अलावा कटहल के फ़लों का अचार और पापड भी बनाया जाता है।

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अगर आप kathal को सिर्फ स्वाद में मांसाहार का शाकाहारी विकल्प मानकर खाते हैं तो इसके पोषक तत्वों के बारे में जानने के बाद इसका स्वाद आपको और बेहतर लगेगा। 100 ग्राम कटहल में 303 मिलीग्राम पोटैशियम, 24 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, विटामिन ए,सी और थाइमिन, 0.108 ग्राम विटामिन बी6, 37 ग्राम मैग्नीशियम, 94 कैलोरी, 14 एमसीजी फोलेट जैसे कई पोषक तत्व होते हैं। इस फल में खूब सारा फाइबर पाया जाता है साथ ही इसमें बिल्‍कुल भी कैलोरी नहीं होती है। क्या आपको जानकारी है कि पके हुए कटहल के गूदे को अच्छी तरह से मैश करके पानी में उबाला जाए और इस मिश्रण को ठंडा कर एक गिलास पीने से जबरदस्त स्फ़ूर्ती आती है, यह हार्ट के रोगियों के लिये भी अच्छा माना जाता है। कटहल के बीज की मींगी वीर्यवर्धक ,वात ,पित्त तथा कफ नाशक होती है। मंदाग्नि रोग वालों को कटहल खाना छोड़ देना चाहिए।

कटहल (Jackfruit) का विभिन्न रोगों में आयुर्वेदिक उपचार :-

    1. पोटैशियम की अधिकता की वजह से यह लो ब्लड प्रेशर में बहुत फायदेमंद है। इसके अलावा, यह डायरिया और दमा के रोगियों के लिए भी फायदेमंद है। विटामिन सी की वजह से यह एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर है और पेट में अल्सर की आशंका कम करता है।
    2. kathal  के फल के अलावा इसके बीज भी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद हैं। kathal  की मसालेदार सब्जी किसी के भी मुंह में पानी ला सकती है. ये दुनिया के सबसे बड़े फलों में से एक है. कटहल का इस्तेमाल न केवल सब्जी बनाने में बल्क‍ि अचार, पकौड़े और कोफ्ता बनाने में भी किया जाता है| पका कटहल भी काफी पसंद किया जाता है|
    3. kathal  एक ऐसी सब्जी है जो कई औषधीय गुणों से भरपूर है, लेकिन फिर भी बहुत कम लोग हैं, जो इसका सेवन नियमित रूप से करते हैं। कटहल का वानस्पतिक नाम आर्टोकार्पस हेटेरोफिल्लस है। इसके फलों में कई महत्वपूर्ण कार्बोहाइड्रेट के अलावा कई विटामिन भी पाए जाते हैं।
    4. जोड़ों के दर्द में रामबाण :- फल के छिलकों से निकलने वाला दूध यदि गांठनुमा सूजन, घाव और कटे-फ़टे अंगों पर लगाया जाए तो आराम मिलता है। इसी दूध से जोड़ों पर मालिश की जाए तो जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है।
    5. कटहल में ढ़ेरों ऐसे तत्व होते हैं जो शरीर की कई आवश्यकताओं को पूरा करते हैं. इसमें विटामिन ए, विटामिन सी, थायमीन, पोटैशियम, कैल्शियम, आयरन और जिंक प्रचुर मात्रा में होता है|
    6. इन सबके अलावा इसमें भरपूर फाइबर होता है. अच्छी बात ये है कि इसमें कैलोरी नहीं होती है. ऐसे में ये हार्ट से जुड़ी कई बीमारियों में भी फायेमंद है|
    7. डायबिटीज में लाभदायक :- गुजरात के आदिवासी कटहल की पत्तियों के रस का सेवन करने की सलाह डायबिटीज के रोगियों को देते हैं। यही रस हाई ब्लडप्रेशर के रोगियों के लिए भी उत्तम है।
    8. कटहल में मैग्नीशियम भी पर्याप्त मात्रा में होता है. जिसकी वजह से हड्डियां भी स्वस्थ और मजबूत रहती हैं.
    9. खाना जल्दी पचा देता है :- पके हुए kathal  के गूदे को अच्छी तरह से मैश करके पानी में उबाल लें। इस मिश्रण को ठंडा कर एक गिलास पीने से जबरदस्त स्फूर्ति आती है। यही मिश्रण यदि अपच के शिकार रोगी को दिया जाए तो उसे फायदा मिलता है।कटहल में पाए जाने वाले विटामिन सी की वजह से रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी बनी रहती है.
    10. कटहल का सबसे बड़ा फायदा ये है कि इसमें भरपूर रेशे होते हैं. जो पाचन क्रिया को बेहतर बनाए रखते हैं.
    11. कटहल में पाया जाने वाला पोटैशियम हार्ट से जुड़ी बीमारियों से सुरक्षित रखता है. उच्च रक्तचाप के मरीजों के लिए ये बहुत ही फायदेमंद है.
    12. अल्सर में है बेहतरीन दवा :- कटहल की पत्तियों की राख अल्सर के इलाज के लिए बहुत उपयोगी होती है। हरी ताजा पत्तियों को साफ धोकर सुखा लें। सूखने के बाद पत्तियों का चूर्ण तैयार करें। पेट के अल्सर से ग्रस्त व्यक्ति को इस चूर्ण को खिलाएं। अल्सर में बहुत जल्दी आराम मिलेगा।
  1. ये आयरन का एक अच्छा स्रोत है जिसकी वजह से रक्ताल्पता से बचाव होता है. साथ ही इसके प्रयोग से रक्त परिसंचरण भी नियंत्रित रहता है.
  2. अस्थमा के इलाज में भी ये एक कारगर औषधि की तरह काम करता है. कच्चे कटहल को पानी में उबालकर छान लें. जब ये पानी ठंडा हो जाए तो इसे पी लें. नियमित रूप से ऐसा करने से अस्थमा की समस्या में फायदा होता है.
  3. मुंह के छालों में असरदार :- जिन लोगों को मुंह में बार-बार छाले होने की शिकायत हो, उन्हें कटहल की कच्ची पत्तियों को चबाकर थूकना चाहिए। आदिवासी हर्बल जानकारों के अनुसार, यह छालों को ठीक कर देता है। इसमें पाए जाने वाले कई खनिज हार्मोन्स को भी नियंत्रित करते हैं.
  4. थायराइड में असरदार :- यह शरीर का थायराइड भी संभालता है। इसमें मौजूद सूक्ष्म खनिज और कॉपर थायराइड चयापचय के लिये प्रभावशाली होता है। खासतौर पर यह हार्मोन के उत्‍पादन और अवशोषण के लिये अच्छा माना जाता है।
  5. आंखों तथा त्वचा पर :- इसका स्वास्थ्य लाभ आंखों तथा त्वचा  पर भी देखने को मिलता है। इस फल में विटामिन ए पाया जाता है जिससे आंखों की रौशनी बढती है और स्किन अच्छी होती है। यह रतौंधी को भी ठीक करता है।

Article Source :- http://homenaturecure.blogspot.in/

 सावधानी :-

पका कटहल का फल कफवर्धक है, अत: सर्दी-जुकाम, खांसी, अर्जीण आदि रोगों से प्रभावित व्यक्तियों एवं गर्भवती महिलाओं को kathal  का सेवन नहीं करना चाहिए।

kathal  खाने के बाद पान खान से पेट फूल जाता है और अफरा होने का डर रहता है अत: भूल कर भी कटहल के बाद पान न खाएं।दुबले-पतले पित्त प्रकृति वाले व्यक्ति को पका कटहल दोपहर में खाकर कुछ देर आराम करना चाहिए।

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