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कंजंक्टिवाइटिस(आँखों से पानी आना) मेरे नैना सावन भादो

कंजंक्टिवाइटिस (आँखों से पानी आना या Eye Infection)

कंजंक्टिवाइटिस :- आँखों से पानी आना, आँखों में खुजली, आँखों का लाल हो जाना और आँखों में सूजन आ जाती है। आजकल का मौसम तेज धूप के बाद बारिष और उसके बाद फिर तेज धूप का असर हमारी आँखों पर सीधा पड़ता है. आंख हमारे शरीर का सबसे नाजुक और संवेदनशील अंग है। इसलिए इनकी देखभाल में सबसे ज्यादा सावधानी की जरूरत होती है। खासतौर पर बारिश के मौसम में। बारिश का मौसम कंजक्टिवाइटिस के लिए सबसे सही समय होता है। प्रभावित व्यक्ति को हर समय यही लगता रहता है कि उसकी आंख में रेत जैसा कुछ गड़ रहा है। इस मौसम में थोड़ी सी लापरवाही आँखों को काफी नुकसान पहुंचा सकती है।

आँखों को रगडे नहीं :-

कंजंक्टिवाइटिस बैक्टीरिया :- कंजंक्टिवाइटिस, कंजंक्टिवा, जो कि ऊतकों की पतली पारदर्शी झिल्ली है और आँखों की उपरी त्वचा (पलक) की भीतरी परत है तथा आँख के सफ़ेद हिस्से को ढकती है, का संक्रमण या सूजन है। कंजंक्टिवा की सूक्ष्म रक्त वाहिनियाँ सूज जाती हैं और दिखाई देने लगती हैं। इसके कारण आँखें लाल या गुलाबी दिखने लगती हैं। कंजंक्टिवाइटिस, जिसे गुलाबी आँख भी कहा जाता है, खासकर बच्चों में, आँखों का एक सामान्य रोग है। यह एक अथवा दोनों आँखों को प्रभावित कर सकता है कंजंक्टिवाइटिस के कुछ प्रकार अपने आप ठीक हो जाते हैं। किन्तु शेष को चिकित्सा की आवश्यकता होती है। आमतौर पर यह आँख का साधारण संक्रमण है। वायरल इंफेक्शन यह एक या दोनों आखों में हो सकती है। इसमें यह बीमारी एक आख से शुरू होकर दूसरे में पहुंचती है।

कंजंक्टिवाइटिस दो प्रकार का होता है। कंजंक्टिवाइटिस यह तापमान के तेजी से बदलने यानी ज्यादा या कम होने पर होता है। हालाकि यह अपने आप चार-पाच दिनों में ठीक हो जाता है। दूसरा है बैक्टीरियल कंजंक्टिवाइटिस। यह बच्चों को जल्द गिरफ्त में ले लेता है। बरसात का मौसम और तेज धूप के साथ उमस भरी गर्मी से वातावरण चारों ओर से प्रदूषित हो जाता है। बरसात के बाद जब धूप निकलती है, तो जलभराव वाले स्थान सूखने लगते हैं। इस दौरान गंदगी वाले स्थानों से हवा के साथ कण भी उड़ते हैं। जिसके चलते आखों में वायरल इंफेक्शन हो सकता है। यह मौसम वैक्टीरिया और वायरल के लिए एकदम अनुकूल है।

कंजंक्टिवाइटिस को बोलचाल की भाषा में आंख आना कहते हैं। इसकी वजह से आंखें लाल, सूजन युक्त, चिपचिपी [कीचड़युक्त] होने के साथ-साथ उसमें बाल जैसी चुभने की समस्याएं हो सकती हैं। आमतौर पर बैक्टीरिया या वायरस के इंफेक्शन अथवा एलर्जी के कारण यह तकलीफ होती है।

 प्रमुख तीन प्रकार के इंफक्शन होते हैं

1 बैक्टीरियल कंजंक्टिवाइटिस -दोनों आंखों से बहुत अधिक कीचड़ आना।

समाधान — डॉक्टरी सलाह से एंटीबायोटिक ड्रॉप्स या ऑइंटमेंट का इस्तेमाल करें।

2  वायरल कंजंक्टिवाइटिस– कीचड़युक्त पानी काम आना, एक आंख से पानी आना।

समाधान— गुनगुने या फिर नमक मिले पानी अथवा बोरिक एसिड पाउडर से दिन में कई बार आंखों को धोएं। डॉक्टरी सलाह लें।

 3 एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस: दोनों आंखों से पानी आना, खुजली होना और लाली आना

समाधान— वायरल कंजंक्टिवाइटिस में बताए उपायों पर अमल करें।

बैक्टीरियल और वायरल कंजंक्टिवाइटिस बहुत तेजी से फैलने वाला रोग है।

 कंजक्टिवाइटिस की पहचान :- 

कंजंक्टिवाइटिस के लक्षण सूजन के कारण पर निर्भर करते हैं, जो हो सकते हैं:

  • आँख के सफ़ेद हिस्से में या पलक में लालिमा।
  • आँखों में दर्द।
  • पानी निकलने की मात्रा में बढ़ोतरी।
  • बरौनियों पर गाढ़े पीले द्रव की मोटी परत का बहकर जमना, खासकर नींद के समय।
  • आँख से हरे या सफ़ेद स्राव का बहना।
  • आँखों में खुजली।
  • आँखों में जलन।
  • धुंधला दिखाई देना।
  • प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता का बढ़ना।
  • आँखों में हर समय पानी दिखाई देना।
  • आँख में बेचैनी।
• सबसे आम लक्षण है आंखों में जलन और रेत कणों के अंदर होने का एहसास होना। अंदरुनी पलके और आंखों के किनारे तक लाल सुर्ख हो जाती हैं। आंखों से लगातार पानी भी गिरता है। सुबह सोकर उठने पर दोनों पलकें आपस में चिपकी हुई मिल सकती हैं। कई लोगों की आंखें सूज जाती हैं और वे तेज रोशनी के प्रति संवेदनशील हो जाती हैं।

इन बातों का रखें ख्याल

 • कंजक्टिवाइटिस होने पर डाक्टर की सलाह जरूर लें। आखों को दिन में तीन से चार बार धोएं। घरेलू उपचार में समय गंवाने के बजाए डाक्टर की सलाह लें। याद रखें समय पर इसका इलाज नहीं किया गया तो कार्निया में जख्म हो सकता है जो घातक साबित हो सकता है। कंजक्टिवाइटिस संक्रामक बीमारी है। यानी सम्पर्क में आने पर यह एक व्यक्ति से दूसरे में फैलती है।
 • परिवार में जो व्यक्ति संक्रमित है, उसका सामान अलग रखें। आंखों को साफ करने के लिए साफ तौलिया या रुमाल का इस्तेमाल करें। घर के बाहर निकलने से पहले धूप का चश्मा लगाएं। यह न सिर्फ धूप से बचाता है बल्कि धुंए और गंदगी से होने वाली एलर्जी से भी रक्षा करता है। आखों में दवा डालने के पहले और बाद में हाथों को अच्छी तरह धो लें। बार-बार अपनी आखों को हाथ से न छुएं। आंखों को हमेशा साफ और ठंडे पानी से धोएं

कम रोशनी में पढ़ाई न करें। आख में कुछ गिर जाने पर उसे मले नहीं। उसे साफ पानी से धुले। आराम न मिले तो तुरंत चिकित्सक की सलाह लें।

कंजंक्टिवाइटिस के विभिन्न कारण हैं, जिनमें:

  • वायरस या बैक्टीरिया के संक्रमण से उत्पन्न कंजंक्टिवाइटिस।
  • उत्तेजक जैसे कि शैम्पू, धूल, धुआं या रसायन द्वारा उत्तेजित कंजंक्टिवाइटिस।
  • एलर्जी जैसे कि धूल या परागकण, या एक विशेष प्रकार की एलर्जी जो कांटेक्ट लेन्स उपयोग करने वालों को प्रभावित करती है – एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस।
  • अपवादस्वरूप मामलों में फफूंद और परजीवी (पैरासाइट्स)।
  • क्लेमायडिया।

रोग अवधि

उचित चिकित्सा के साथ लक्षण एक सप्ताह में चले जाते हैं। लेकिन, कुछ मामलों में, लक्षण तीन सप्ताह तक रह सकते हैं, ऐसा उन कुछ चुनिन्दा लोगों में होता है, जो दो से तीन सप्ताह की चिकित्सा के बाद भी ठीक नहीं होते।
इस रोग से ठीक होते समय उन रोगियों को जिनका प्रतिरक्षा तंत्र कमजोर है या जो कांटेक्ट लेंस पहनते हैं या जिनकी केवल एक आँख काम कर रही है उन्हें विशेष सतर्कता रखने की आवश्यकता होती है।

  • एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस- जब एलर्जन (हानिकारक पदार्थ) हटा दिया जाता है, ये 24 घंटे में बेहतर होने लगता है।
  • बैक्टीरियल कंजंक्टिवाइटिस- 2 से 3 दिनों में सुधरना आरंभ होता है।
  • वायरल कंजंक्टिवाइटिस-एक या दो दिनों तक रहता है और इसे किसी विशेष चिकित्सा की आवश्यकता नहीं होती।

निदान

सामान्यतया कंजंक्टिवाइटिस का निर्धारण होता है

  • लक्षणों के लिए आँख की जाँच द्वारा।
  • विजुअल एक्विटी (देखने की क्षमता) की माप।
  • कंजंक्टिवा और आँख के बाहरी ऊतकों का परीक्षण।
  • आँख के भीतरी हिस्सों का परीक्षण।
  • कंजंक्टिवा का द्रव परीक्षण हेतु लेना।

लेने योग्य आहार

  • कंजंक्टिवाइटिस को रोकने के लिए आहार हैं-हरी पत्तेदार सब्जियाँ जैसे पालक, पत्तागोभी तथा फल और सब्जियाँ जिनका रंग नारंगी हो जैसे संतरे, गाजर, पपीता और आम।
  • सभी फल जैसे सेब, संतरे, नाशपाती, अन्नानास, ग्रेपफ्रूट और अंगूर। एक फल जिससे बचना चाहिए वो है केला।
  • विटामिन A आँखों को बहुमूल्य पोषण प्रदान करता है। आहार जैसे कि अंडे, मछली के लीवर का तेल, और दूध तथा डेरी उत्पाद जैसे कि मक्खन, गाजर, कद्दू
  • विटामिन B2 के अनमोल स्रोत बादाम, दूध, हरी पत्तेदार सब्जियाँ, खट्टे फल और टमाटर आदि हैं।
  • जिंक से भरपूर आहार जैसे कि साबुत अनाज, डेरी उत्पाद, गोश्त, मुर्गी, मछली लेने चाहिए।
  • सब्जियों का और नीबू का रस रोगियों के लिए लाभकारी होता है।

ना लेने योग्य आहार

  • रोगी को स्टार्च युक्त और शक्कर युक्त आहारों के अधिक सेवन से बचना चाहिए जो कि सफ़ेद ब्रेड, रिफाइंड अनाज, आलू, पुडिंग, पाई, पेस्ट्री, शक्कर, जैम, और शक्कर की मीठी गोलियों के रूप में होते हैं, ये कतरल स्थिति (एक तरह की सूजन का रोग) और कंजंक्टिवाइटिस देते हैं।
  • रोगी को गोश्त और अन्य प्रोटीन तथा वसायुक्त आहार, कड़क चाय और कॉफ़ी, नमक, मसाले, और सॉस के अधिक मात्रा में प्रयोग से बचना चाहिए।
  • आँखों से पानी आना

व्यायाम

  • चूंकि कंजंक्टिवाइटिस आँखों का संक्रमण है, आँखों का व्यायाम उचित हल नहीं है क्योंकि आपकी आँखों को आराम की आवश्यकता होती है।
  • लेकिन रोगी आँख के कुछ व्यायाम जैसे कि आँखों को हौले से ऊपर नीचे घुमाना, एक तरफ से दूसरी तरफ गोल आकार बनाते हुए क्लॉकवाइज और एंटीक्लॉकवाइज घुमाना, एक तरफ करके गोलाकार और अर्द्ध गोलाकार घुमाना और हौले से कन्धों को क्लॉक वाइज और एंटी क्लॉक वाइज घुमाना जिससे कि आँखों को आराम और शक्ति मिले।

करने योग्य चीजें

  • आँखों पर कुनकुने पानी की पट्टी रखें।
  • एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस के लिए ठंडी पट्टी रखें।
  • घर में रहें और अन्य लोगों से अपनी वस्तुएं ना बाँटें।
  • संक्रमित आँख को मसलें नहीं।
  • गहरे रंग का चश्मा लगाकर आँखों को धूल और प्रदूषण से बचाएं।
  • आँखों के मेकअप और कांटेक्ट लेंस से बचें।

रोकथाम

  • संक्रमित आँख को छुएं या मसलें नहीं।
  • अपने हाथों को कीटाणु नाशक से बार बार धोते रहें।
  • आँखों के लिए उत्तेजक पदार्थों जैसे कि परफ्यूम्स या धुएं की चपेट में आने से बचें।
  • तकिये के गिलाफ नियमित रूप से बदलें।
  • आँखों पर मेकअप करने से बचें और अपनी सामग्री किसी से बांटें नहीं।
  • लेंस को और उन्हें रखने के डिब्बे को स्वच्छ और रोगाणुमुक्त रखें।
  • दूसरे व्यक्ति के कांटेक्ट लेंस कभी ना पहनें।
  • कांटेक्ट लेंस के स्थान पर चश्मा लगायें अथवा कंजंक्टिवाइटिस पूरी तरह ठीक ना होने तक कांटेक्ट लेंस ना पहनें।
  • प्रत्येक उपयोग के पश्चात, आँखों से स्पर्श हुए तौलिये, टिश्यू और अन्य सामग्री को यथायोग्य मशीन में धोएं अथवा फेंक दें।
  • सामान्य वस्तुएं जैसे कि बिना धुले तौलिये या गिलास को बाँटने से बचें।
  • अपने अथवा बच्चे की आंख में आई ड्राप या ऑइंटमेंट लगाने के बाद अपने हाथ धोएं।
  • स्वच्छता बनाये रखें।
  • जब तक कि लक्षण कम नहीं हो जाते, घर में रहें और बाहर जाने से बचें।
  • अपनी आँखों को धूल, प्रदूषण, और रसायनों से बचाएँ।

आम सवालों के जवाब जो हर व्यक्ति के मन में आते हैं

Q1.कंजंक्टिवाइटिस क्या है?
कंजंक्टिवाइटिस आँख की कंजंक्टिवल परत, जो स्क्लेरा (आँख का सफ़ेद हिस्सा) और पलक के अंदरूनी हिस्से को ढकती है, का संक्रमण या सूजन है। सामान्यतया ये बैक्टीरिया द्वारा होता है। इसके कारण आँखों से पानी आना, स्राव, धुंधला दिखाई देना और प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता बढ़ना आदि होता है।
Q2. मुझे कंजंक्टिवाइटिस कैसे हो सकता है?
आपको कंजंक्टिवाइटिस हो सकता है यदि रोग उत्पन्न करने वाला बैक्टीरिया आपके कंजंक्टिवा के संपर्क में आये। कंजंक्टिवाइटिस के रोगी के संपर्क में आने से ऐसा होने की संभावना बहुत अधिक होती है। बैक्टीरियल कंजंक्टिवाइटिस के रोगियों को रोग को फैलने से रोकने के लिए चश्मा पहनने की सलाह दी जाती है।
Q3. कंजंक्टिवाइटिस के लिए इलाज क्या है?
इलाज कारण पर निर्भर करता है। बैक्टीरिया द्वारा उत्पन्न कंजंक्टिवाइटिस का इलाज एंटीबायोटिक ड्राप से किया जाता है। एलर्जी द्वारा उत्पन्न कंजंक्टिवाइटिस का इलाज एंटी-एलर्जिक ड्रॉप्स से किया जाता है।
Q4. ठीक होने में कितना समय लगता है?
कंजंक्टिवाइटिस को ठीक होने में 3-5 दिनों का समय लगता है. आपको अपनी आँखों को कुनकुने पानी से नियमित धोने की और प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता को कम करने के लिए गहरे रंग का चश्मा लगाने की सलाह दी जाती है। कांटेक्ट लेंस से बचना चाहिए।
Q5. मैं कंजंक्टिवाइटिस को कैसे रोक सकता हूँ?
आप आवश्यक स्वच्छता बनाये रखकर और संक्रमित हाथों से आँखों को ना मसलकर कंजंक्टिवाइटिस से बचाव कर सकते हैं। कंजंक्टिवाइटिस के रोगी से निकट संपर्क से बचें।

Article Source :- https://www.mtatva.com/

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