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आलूबुखारा के आयुर्वेदिक और औषधीय गुण

आलूबुखारा/Aalu Bukhara/ Plum

आलूबुखारा गोल मटोल लाल रंग का देखने में थोड़ा सा सख्त होता है पर खाने में इतना स्वादिष्ट होता हैं। कटोरा भर फलों की सलाद में जितने पौष्टिक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं उतनें ही पौष्टिक तत्व एक आलूबुखारे में होते हैं। आलूबुखारे का सेवन करने से हमारे शरीर को कई बीमारियों से राहत मिलती हैं जैसे आंखों, कैंसर, डायबिटीज, मोटापे संबंधित कई बीमारियों से राहत मिलती है ।

आलूबुखारा एक स्वास्थ्यवर्धक फल है. आलूबुखारा में भरपूर मात्रा में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट शरीर की रोग प्रतिरक्षा क्षमता को बढ़ता है और शरीर को कई तरह की बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करता है. इस फल में नियासिन, राइबोफ्लेविन और थायमिन जैसे तत्व भी पाये जाते हैं। इसके सेवन से शरीर के विषैले तत्व बाहर निकल जाते हैं.

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आलूबुखारा में कार्बोहाइड्रेट की अधिक तथा कैलोरी और फैट की मात्रा बहुत कम होती है. इसमें कई तरह के पोषक तत्व, मिनरल और विटामिन पाये जाते है. आलूबुखारा विटामिन ए, के, सी  कैल्शियम, मैग्नीशियम, फोस्फोरस, कॉपर, आयरन, पोटेशियम और फाइबर का बहुत अच्छा स्त्रोत है.

इसके सेवन से हाई ब्लड़ प्रेशर, स्ट्रोक आदि का खतरा कम हो जाता है और शरीर में आयरन की मात्रा बढ़ती है. आलूबुखारे में कई तरह के विटामिन और मिनरल पाएं जाने के कारण यह हमारे शरीर के आवश्यक विटामिन और मिनरल की पूर्ति करता है. इससे पेट संबंधी समस्याएं कम होती है और पाचन क्रिया दुरूस्त रहती है। इसमें मौजूद फाइबर के कारण आलूबुखारे के सेवन से पेट में भारीपन नहीं होता है और आंतों को भी आराम मिलता है.

आलूबुखारे का पेड़ लगभग 4 से 5 मीटर ऊंचा होता है। इसके फल को आलूबुखारा कहते हैं। यह पर्शिया, ग्रीस और अरब के आस-पास के क्षेत्रों में बहुत होता है। हमारे देश में भी आलूबुखारा अब होने लगा है। आलूबुखारे का रंग ऊपर से मुनक्का के जैसा और भीतर से पीला होता है। पत्तों के भेद के अनुसार आलूबुखारे की 4 जातियां होती हैं। अधिकतर यह बुखारा की ओर से यहां आता है, इसलिए इसे आलूबुखारा कहते हैं। इसके बीज बादाम के बीज की तरह ही परन्तु कुछ छोटे होते हैं। इसका फल आकार में दीर्घ वर्तुलाकार होकर एक ओर फूला हुआ होता है। अच्छी तरह पकने पर यह फल खट्टा, मीठा, रुचिकर और शरीर को फायदेमंद होता है, परन्तु इन फलों को अधिक खाने से वायु रोग औरदस्त हो जाते हैं।

विभिन्न भाषाओं में नाम :

संस्कृत आरुक।
कर्नाटकी आरुक।
हिंदी आलूबुखारा।
मराठी आलूबुखारा।
गुजराती आलू।
फारसी आलुस्या।
अरबी इज्जासु।
लैटिन पुनस बोखेरियनसिस
अंग्रेजी चेरिप्लम।

रंग : यह लाली लिए पीले रंग का होता है।

स्वाद : आलूबुखारा फीका खट्टा और मधुर होता है।

स्वरूप : यह एक फल है जो बलख बुखारे में उत्पन्न होता है।

स्वभाव : आलूबुखारा शीतल प्रकृति का होता है।

हानिकारक : इसकी अधिकता मस्तिष्क के लिए हानिकारक हो सकती है।

मात्रा : 15 से 20 दाने तक।

गुण :

स्वभाव को कोमल करता है, आंतों में चिकनाहट पैदा करता है, पित्त बुखार और रक्त ज्वर में लाभकारी है, शरीर की खुजली को दूर करता है प्यास को रोकता है। खट्टा होने पर भी खांसीनहीं करता तथा प्रमेह, गुल्म और बवासीर का नाश करता है।

यह ग्राही, फीका, मलस्तंभक, गर्म प्रकृति, कफपित्तनाशक, पाचक, खट्टा, मधुर, मुखप्रिय तथा मुख को स्वच्छ करने वाला होता है और गुल्म, मेह, बवासीर और रक्तवात का नाश करता है। पकने पर यह मधुर, जड़, पित्तकर, उश्ण, रुचिकर, धातु को बढ़ाने वाला और प्रिय होता है। मेह, ज्वर तथा वायु का नाश करता है।

आलूबुखारा के आयुर्वेदिक गुण

  1. वजन नियंत्रित करें :- आलूबुखारा में फैट की मात्रा कम होने के कारण इसके सेवन से फैट नहीं बढ़ता है और शरीर का वजन नियंत्रित रहता है। वजन कम करने वाले लोगों के लिए यह बहुत फायदेमंद होता है। आलूबुखारे के सेवन ज्याजदा भूख लगने की समस्याव से भी बचा जा सकता है।
  2. बालों के लिए फायदेमंद :- आलूबुखारे हमारे बालों को सुंदर बनाने में मदद करता है और साथ ही बालों संबंधित समस्याओं से राहत दिलवाने में मदद करता है।
  3. दिल को सुरक्षित रखें :- आलूबुखारा में मौजूद विटामिन ‘के’ दिल दुरुस्त रखता है। इसके सेवन से रक्त में थक्केे नहीं जमते, ब्लेड प्रेशर ठीक रहता है। आलूबुखारा में पौटेशियम भरपूर मात्रा में होता है जिससे हार्ट अटैक आदि पड़ने का खतरा समाप्त  हो जाता है। इसके अलावा इसमें भरपूर मात्रा में ओमेगा 3 की मौजूदगी दिल को स्वनस्थस बनाती है।
  4. इम्यूसनिटी बढाएं :- आलूबुखारे में मौजूद विटामिन सी इम्यूंनिटी को बढ़ाता है और शरीर को स्वसस्थव रखता है। हाल ही में हुए एक अध्युयन के अनुसार, आलूबुखारा के सेवन से शरीर में मिनरल ज्या्दा मात्रा में शोषित होने के कारण शरीर एनर्जी ज्यादा मिलती है।
  5. कैंसर को रोकें :- अध्ययनों से पता चला है की आलूबुखारा एक एंटी-कैंसर एजेंट हैं जो कैंसर और ट्यूमर की कोशिकाओं को बढ़ने से रोकता है। आलूबुखारा में मौजूद एंटी-ऑक्सीसडेंट और कई अन्यं तरह के पोषक तत्व  शरीर में कैंसर कोशिकाओं को एक्टिव नहीं से रोकते हैं। इसके सेवन से फेफड़ों और मुंह का कैंसर नहीं होता है।
  6. कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करें :- आलूबुखारा में घुलनशील फाइबर होते है। इसके सेवन से शरीर में कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रहता है। इसके सेवन से आंत दुरूस्तर रहती है। आलूबुखारा शरीर में बाईल की मात्रा को बढ़ाता है, जिससे मोटापा कम होने के साथ ही कोलेस्ट्रॉ ल को भी कम करने में मदद करता है।
  7. हड्डियों के लिए फायदेमंद :- आलूबुखारे का सेवन करने से हमारे शरीर को कई रोगों से तो निजात मिलती ही है और साथ ही शरीर में हड्डियों को भी मजबूत बनाने में मदद करता है।
  8. आंखों के लिए लाभकारी :- आलूबुखारा में विटामिन ए और बीटा कैरोटीन अधिक मात्रा में पाया जाता है। विटामिन ‘ए’ आंखों को स्वस्थ रखने में मदद करता है। इसिलिए इसका सेवन आंखों के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है। इसके सेवन से आंखें तेज होती है और हानिकारक यूवी किरणों से भी बच जाती है।
  9. त्वचा को बनाएं स्वस्थ और ग्लोइंग :- आलू बुखारा में एंटीआक्सीडेंट की मौजूदगी के कारण इसके नियमित सेवन से स्किन ग्लो करने लगती है। इसे खाने से याददाश्त भी बेहतर होती है।
  10. रोग प्रतिरोधक क्षमता में बढ़ोतरी करता है :- आलू बुखारा में विटामिन सी भरपूर मात्रा में होता है। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। जिन लोगों को सर्दी और जुकाम की समस्या ज्यादा रहती है, उन्हें आलू बुखारा का नियमित सेवन करना चाहिए।
  11. डाइजेस्टिव सिस्टम को स्वस्थ बनाता है :- आलू बुखारा में फाइबर उपस्थित होने के कारण इसके नियमित सेवन से डाइजेस्टिव सिस्टम स्वस्थ रहता है।
  12. डायबिटीज को नियंत्रित करता है :- यह शरीर के शुगर लेवल को नियंत्रित रखता है। यही कारण है कि इसे डायबिटीज रोगियों के लिए अच्छा माना गया है।
  13. शरीर को मिलती है ऊर्जा :- आलू बुखारा के सेवन से शरीर की मिनरल अवशोषित करने की क्षमता बढ़ती है, इसलिए इसे खाने पर ताजगी और ऊर्जा का एहसास होता है।
  14. गर्भावस्था में फायदेमंद :- आलूबुखारे का सेवन करना गर्भवती महिलाओं के लिए काफी लाभकारी साबित होता हैं और साथ ही शिशु के लिए फायदेमंद होता हैं और गर्भावस्था में होने वाली समस्याएं जैसे पेट संबंधित ,एेसे में आलूबुखारे का सेवन करना  फायदेमंद साबित होता है ।

आलूबुखारा के औषधीय गुण

    1. नकसीर :– आलूबुखारे के पत्तों का रस निकालकर १-२ बूँद नाक में डालने से नकसीर में लाभ होता है |
    2. पित्तविकार :- भोजन से पूर्व आलूबुखारे के मीठे फल का सेवन करने से यह पित्त विकारों का शमन करता है |
    3. उदरकृमि :- आलूबुखारे के पत्तों को पीसकर पेट पर लेप करने से पेट के कीड़े निकल जाते हैं |
    4. तृष्णा :- आलूबुखारे का सेवन करने से प्यास व अरुचि का शमन होता है |
    5. अजीर्ण :- इसके बीजों को बादाम की तरह शुष्क फल (dry fruits ) के रूप में खाने से अजीर्ण में लाभ होता है |
  1. स्मृतिवर्धनार्थ :- आलूबुखारे के बीज की गिरी का सेवन करने से धीरे-धीरे स्मरणशक्ति बढ़ती है |
  2. कब्ज़ :- मलबद्धता की बीमारी को दूर करने के लिए आलू बुखारे का प्रयोग करना बहुत ही लाभकारी होता है. पेट में कब्ज की शिकायत होने पर आलू बुखारे को पानी में घिस ले, और उसका सेवन करें. पेट की कब्ज खत्म हो जाएगी. पेट की कब्ज को दूर करने के लिए एक और उपाए को अपनाया जा सकता है. इस उपाय के लिए एक आलू बुखारा ले. एक अंजीर ले. कुछ दाने मुनक्का के ले. इन तीनो को पानी में डालकर अच्छी तरह से धो ले. अब एक काँच के बर्तन को ले और उसमे दो गिलास पानी डालकर उसमे तीनो चीजो को डाल दे. इसे रात भर ऐसे ही रहने दे. सुबह उठकर भीगे हुए अंजीर, मुनक्का, व आलू बुखारे को खाने के बाद ऊपर से पानी पी ले. पेट की कब्ज खत्म हो जाएगी.
  3. मुंहसुखना :- अगर किसी व्यक्ति का बार – बार मुंह सुख रहा हो तो उसे आलू बुखारे का सेवन करना चाहिए. दिन में दो बार आलू बखारे को मुंह में रख कर चूसने से मुंह नही सूखता तथा प्यास भी अधिक नही लगती.

Article Source :- http://www.yogasir.com/https://hashmidawakhana.wordpress.com/

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