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आक के औषधीय एवं आयुर्वेदिक गुण

आक (Calotropis gigantea)

आक , आकडा , मदार इसे हम शिवजी को चढाते है ; अर्थात ये ज़हरीला होता है . इसलिए इसे निश्चित मात्रा में वैद्य की देख रेख में लेना चाहिए .पर कुछ आसान प्रयोग आप कर सकते है –

    1. अगर किसी को चलती गाडी में उलटी आती हो ( motion sickness ) तो यात्रा पर निकलते समय जो स्वर चल रहा हो अर्थात जिस तरफ की श्वास ज़्यादा चल रही हो उस पैर के नीचे Aak के पत्ते रखे . यात्रा के दौरान कोई तकलीफ नहीं होगी .
    2. आक के पीले पड़े पत्तों को घी में गर्म कर उसका रस कान में डालने से कान का दर्द ठीक होता है .
    3. Aak  का दूध कभी भी सीधे आँखों पर नहीं लगाना चाहिए . अगर दाई आँख दुःख रही हो तो बाए पैर के नाख़ून और बाई आँख दुःख रही हो तो दाए पैर के नाखूनों को आक के दूध से तर कर दे .
    1. रुई को आक के दूध और थोड़े से घी में भिगोकर दांत में रखने से दांतों का दर्द ठीक हो जाता है .
    2. हिलते हुए दांत पर Aak  का दूध लगाकर आसानी से निकाला जा सकता है .
    3. पीले पड़े Aak  के पत्तों के रस का नस्य लेने से आधा शीशी में लाभ होता है .
    4. आक की कोपल को सुबह खाली पेट पान के पत्ते में रख चबा कर खाने से ३ से 5 दिनों में पीलिया ठीक हो जाता है .
    5. सफ़ेद आक की छाया में सुखी जड़ को पीस कर १-२ ग्राम की मात्रा गाय के दूध के साथ लेने से बाँझपन ठीक होता है . बंद ट्यूब और नाड़ियाँ खुल जाती है  मासिक धर्म गर्भाशय की गांठों में लाभ होता है .
    6. पैरों के छाले इसका दूध लगाने से ठीक हो जाते है .
    7. गठिया में आक के पत्तों को घी लगा कर तवे पर गर्म कर सेकें .
    8. आक की रुई को वस्त्रों में भर , रजाई तकिये में इस्तेमाल करने से वात रोगों में लाभ मिलता है .
    9. कोई घाव अगर भर ना रहा हो तो आक की रुई उसमे भर दे और रोज़ बदल दे .
    10. Aak  के दूध में सामान मात्रा में शहद मिला कर लगाने से दाद में लाभ होता है .
    11. Aak  की जड़ के चूर्ण को दही में मिलाकर लगाना भी दाद में लाभकारी होता है .
    12. Aak  के पुष्प तोड़ने पर जो दूध निकलता है उसे नारियल तेल में मिलाकर लगाने से खाज दूर होती है .इसके दूध को कडवे तेल में मिलाकर लगाने से भी लाभ होता है .
    13. इसके पत्तों को सुखाकर उसकी पावडर जख्मों पर बुरकने से दूषित मांस दूर हो कर स्वस्थ मांस पैदा होता है .
    14. आक की मिटटी की टिकिया कीड़े पड़े हुए जख्मों पर बाँधने से कीड़े टिकिया पर आ कर मर जाते है और जख्म धीरे धीरे ठीक हो जाता है .

आक (Calotropis gigantea) के घरेलू नुस्खे

  1. आक के दूध के शहद के साथ सेवन करने से कुष्ठ रोग थी होता है .आक के पुष्पों का चूर्ण भी इसमें लाभकारी है .
  2. पेट में दर्द होने पर आक के पत्तों पर घी लगा कर गर्म कर सेके .
  3. स्थावर विष पर २-३ ग्राम आक की जड़ को घिस कर दिन में ३-४ बार पिलाए .
  4. आक की लकड़ी का 6 ग्राम कोयला मिश्री के साथ लेने से शारीर में जमा पारा भी पेशाब के रास्ते निकल जाता है .
  5. कड़वे तेल में इसके पत्तों को पकाकर लगाने से घाव ठीक हो जाता है|
  6. दमा रोग के लिए आक का पत्ता बहुत लाभकारी है| इसके लिए आक के पत्ते पर कत्था-चूना लगाकर पान की तरह खाना चाहिए|
  7. सूजन दूर करने के लिए Aak  का हरा पत्ता पीसकर लेप किया जाता है|
  8. Aak का दूध निकालकर उसका फाहा मुंह पर लगाने से लकवा दूर होता है|

नोट :- Aak और भी कई रोगों का इलाज करता है पर ये योग वैद्य की सलाह से ही लेने चाहिए .  इसके अर्क प्रयोग से होने वाले हानिकारक प्रभाव को कम करने के लिए दूध और घी का प्रयोग करें .

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ज्योतिष की नज़र में :-  दुर्गाजी पर दूब कभी न चढ़ाएं. लक्ष्मीजी को कमल के फूल का चढ़ाने का विशेष महत्व है.

महादेव की पूजा में इसके पुष्पों का प्रयोग होता है। किसी और देवी देवता की पूजा में इसे प्रयुक्त होता मैंने नहीं देखा। भाँग और धतूरा की तरह ही औघड़दानी शिव ने इस सर्वहारा पौधे पर भी अपनी कृपा रखी है। शिव से सम्बद्ध और पौधों की तरह ही टोटका वग़ैरह में भी इसका प्रयोग होता है।

Source :- http://naturalhometreatments.blogspot.in

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