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अश्विनी मुद्रा से आरोग्य एवं आध्यात्मिक लाभ

अश्विनी मुद्रा ( ASHWANI MUDRA)

अश्विनी मुद्रा का अर्थ है “अश्व यानि घोड़े की तरह करना”. घोडा अपने गुदा द्वार को खोलता बंद करता रहता है और इसी से अपने भीतर अन्य सभी प्राणियों से अधिक शक्ति उत्पन्न करता है

अथ अश्वनीमुद्राकथनम्।

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आकुञ्चयेद्गुदद्वारं प्रकाशयेत् पुनः पुनः। सा भवेदश्विनी मुद्रा शक्तिप्रबोधकारिणी ॥८२॥

अश्विनीमुद्रायाः फलकथनम्।

अश्विनी परमा मुद्रा गुह्यरोगविनाशिनी। बलपुष्टिकरी चैव अकालमरणं हरेत् ॥८३॥
श्रीघेरण्डसंहितायां घेरण्डचण्डसंवादे घटस्थयोगप्रकरणे मुद्राप्रयोगो नाम तृतीयोपदेशः ॥

जिस प्रकार से अश्व (घोडा) अपने गुदाद्वार को बार-बार सिकोड़ता एवं ढीला करने की क्रिया करता है उसी प्रकार से अपने गुदाद्वार से यह क्रिया करने से अश्वनी मुद्रा बनती है | इस मुद्रा का नाम भी इसी आधार पर पड़ा है | घोड़े में बल एवं फुर्ती का रहस्य यही मुद्रा है, इस क्रिया के करने के फलस्वरूप घोड़े में इतनी शक्ति आ जाती है कि आज के मशीनी युग में भी इंजन आदि की शक्ति अश्वशक्ति (HORSE POWER) से ही मापी जाती है |

विधि :बिस्तर से उतरें, नीचे धरती पर चटाई-कम्बल आदि बिछा दिया l पूर्व की तरफ सिर कर दिया l श्वास बाहर फेंक दिए, पेट को अन्दर-बाहर २-५ बार किया l योनी को संकोचन-विस्तरण २५ बार करो l फिर श्वास ले लो l फिर श्वास बाहर फेंको और शौच जाने की जगह को, जैसे घोड़ा लीद छोड़ता है, संकोचन-विस्तरण करता है, ऐसे करो l ऐसे ४ श्वास लेकर करो तो १०० बार हो जायेगा l 

सावधानियां : 

अश्वनी मुद्रा करते समय यदि मल-मूत्र का वेग हो तो इस वेग को रोकना नही चाहिए बल्कि इससे निवृत्त हो लेना चाहिए |

यदि गुदाद्वार में किसी प्रकार का गंभीर रोग हो तो यह मुद्रा योग शिक्षक की सलाह अनुसार ही करें।

अश्विनी मुद्रा करने का समय व अवधि : 

  • सामान्य स्थिति में यह क्रिया लेटकर,बैठकर या चलते-फिरते कभी भी दिन में कई बार कर सकते हैं |
  • अश्वनी मुद्रा  एक बार में कम-से-कम 20-30  बार करनी चाहिए |

अश्विनी मुद्रा के चिकित्सकीय लाभ :

  1. अश्वनी मुद्रा के निंरतर अभ्यास से गुदा से सम्बंधित समस्त रोग नष्ट हो जाते हैं |
  2. इस मुद्रा को करने से शरीर बलवान हो जाता है |
  3. अश्वनी मुद्रा करने से व्यक्ति की आयु बढती है एवं वह आजीवन निरोग रहता है |
  4. अश्वनी मुद्रा के अभ्यास से नपुंसकता दूर हो जाती है | यह मुद्रा शीघ्रपतन रोकने में अत्यंत प्रभावी है |
  5. शौच के समय यदि इस क्रिया को बार –बार किया जाये तो शौच खुलकर आता है |
  6. अश्विनी मुद्रा जो की त्रिदोषनाशक है l बवासीर और कब्ज़ में अदभुद लाभ होता है l
  7.  इससे बुद्धि में इजाफा होगा l

अश्विनी मुद्रा के आध्यात्मिक लाभ : 
अश्वनी मुद्रा से कुण्डलिनी शक्ति का जागरण होता है। आपका मूलाधार केंद्र प्रभावशाली होगा l स्वाधिष्ठान केंद्र विकसित होगा l ध्यान भजन में बरकत होगी l

Article Source :- http://returnwithnature.blogspot.in/

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