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अवचेतन मन का उपयोग (Use of Subconscious mind)

अवचेतन मन का उपयोग

अवचेतन मन का उपयोग जिस को भी करना आ गया वो साक्षात् ईश्वर बन गया जी हाँ ये बात बिल्कुल सच है आप इस बात को मानो या ना मानो मुझे भी बहुत बार ये अजीब लगता है लेकिन ये बात 100% सच है आप को ये बात कोई नहीं बताएगा ना ही आपको कही सुनने को मिलेगी अब आप सोच रहे होंगे की क्या ईश्वर बनना इतना आसान है तो में ये कहूंगा की इससे भी ज्यादा आसान है यदि आप ये बात स्वीकार कर लेते हो की आप ईश्वर बनना चाहते हो

अवचेतन मन का उपयोग मैंने भी बहुत बार किया है और बहुत से सुपात्र लोगों को सिखाया भी है आपने इंग्लिश में एक कहावत सुनी होगी “MAKE A PRACTICE MAN PERFECT” ये बिल्कुल सच बात यदि आप मुझ पर यकीं करते हो अवचेतन मन को जितने का या अवचेतन मन का उपयोग जब आप करना चाहोगे तो आपको सब से पहले और लास्ट यही बात सिखानी है की जितनी आप प्रैक्टिस करेंगे अवचेतन मन का उपयोग भी उतना ही कर पाएंगे

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अवचेतन मन का उपयोग कैसे करें  ?

अवचेतन मन  को आप एक काम दीजिये जैसे की आप घर से दूकान और दूकान से घर एक ही रास्ते से कुछ दिन आये और जायें शुरु में आप का ध्यान अपने आस पास की चीज़ों की तरफ जाएगा आपको याद रखना पडेगा की यहाँ मुड़ना है यहाँ सीधे चलना है आदि आदि आप खुद देखेंगे की कुछ दिन में आपके कदम आपको अपने आप दूकान या घर तक ले आयेंगे चाहे आपको रस्ते में कोई और काम करना हो फिर आप चाहे फ़ोन पर बात कर रहे हों या साथ में चलते किसी वयक्ति से आप अपने घर और दूकान पहुँच जायेंगे आप ऐसा करते भी होगे लेकिन कभी आपने इस बात को नोटिस नहीं किया होगा की ऐसा क्यों होता है या इसके पीछे क्या कारण है

अवचेतन मन का उपयोग करने के नियम

तो सबसे पहला नियम ये हुआ की (दोहराने से हर चीज अवचेतन मन का हिस्सा (आदत) बन जाती है। ) अब हम अपने जीवन में आदतों में जैसा चाहें बदलाव ला सकते हैं, नए गुण डाल सकते हैं, असंभव कार्य कर सकते हैं, अपना स्वभाव बदल सकते हैं। पूरी तरह निश्चित कीजिए कि आप कैसा बदलाव चाहते हैं। असमंजसता मानव मस्तिष्क की कमजोरी है, आदत है। जब हम बदलाव चाहते हैं तब अनेक प्रकार के विचार एक साथ चलने लग जाते हैं। कोई भी विचार या निष्कर्ष शक्तिशाली और निश्चित नहीं होने के कारण अवचेतन मन को प्रभावित नहीं कर पाता है, इसलिए बैठकर सोचिए कि आप क्या वास्तविक बदलाव अपने जीवन में चाहते हैं, उसे एक पेपर पर लिखें। संकल्प वर्तमान में लिखें भविष्य में नहीं। जो भी संकल्प आप लिखना चाहते हैं, उसे वर्तमान वाक्य में लिखें। और दोहराते रहें पूरे आत्म विश्वास के साथ आप खुद देखेंगे की कुछ चमत्कार होना शुरु हो गया सब आपके मन मुताबिक हो रहा है और आप वो पा लेंगे जो आप चाहते है

और दूसरा नियम है की (अवचेतन मन सच और कल्पना में अंतर नहीं करता) यह नियम पहले वाले नियम पर भी अपना प्रभाव डालता है आप इसे ऐसा भी बोल सकते हैं की अवचेतन मन को अच्छे और बुरे की पहचान नहीं है वो सिर्फ पहले नियक पर चलता है दूसरा नियम तो पहले वाले को ऑपरेट करता है जस्ट like A  BOSS आपको यदि में किसी example से समझाना चहुँ तो आप ये समझ लीजिये की जैसे आप सो कर उठे और आपको पता लगा की आप 30 मिनट लेट उठे हैं और आपके मन में एक ही बात आएगी की में लेट हो गया और आप यदि समय पर अपने सारे काम ख़तम भी कर लेते हैं तो भी आप लेट ह जाते हैं क्योंकि आपने अपने अवचेतन मन को command दी की में लेट हो गया आप ये शब्द जितनी बार दोहर्यंगे आप उतना लेट होते चले जायेंगे आप कितना भी जल्दी कर लें कोई काम बिच में छोड़ दें फिर भी लेट होंगे और यदि आप उसी समय 30 मिनट लेट उठ कर भी ये सोचें या command दें के में आज समय से पहुँच जाऊंगा तो आप समय पर पहुँच जाओगे ये 100% सही है

अवचेतन मन को ये नहीं पता की आप क्या चाहते है और क्या नहीं उसको सिर्फ इतना पता है की बार बार जो आप मांग रहे हैं वो आपको देना है और अवचेतन मन की शक्ति आपको वो देने में जुट जाती है वो चीज अच्छी है या बुरी वो नहीं जानती

अवचेतन मन का उपयोग करने का आसान तरीका

आप एक छोटे से प्रयोग से शुरु कर सकते हैं मान लीजिए, आप में आत्मविास की कमी है तो वर्तमान में लिखें कि मैं आत्मविास से परिपूर्ण हूं।  यदि आपकी स्मरण शक्ति कमजोर है तो लिखें- मेरी स्मरण शक्ति बहुत तेज है। यदि आप पाने आप को कमजोर अनुभव करते हैं तो लिखें कि मैं स्वस्थ व ऊर्जावान हूं। सुबह जल्दी नहीं उठ पाते  हैं तो लिखें कि मैं सुबह ठीक पांच बजे उठ जाता हूं और अपने सारे काम समय से निबटाता हूं। अगर आप इस बात को दोहराते हुए कल्पना में यह दृश्य बनाते हैं कि आप उस अवस्था को प्राप्त कर चुके हैं और आप वैसे ही हो चुके हैं, जैसा आप चाहते हैं तो अवचेतन मन इसी वर्तमान के दृश्य को स्वीकार करेगा और वैसी ही ऊर्जा निर्मित करना शुरू कर देगा। और आप कुछ दिनों में ही अपने आप में अंतर महसूस करोगे बस आप को ध्यान ये देना है की कही भी आप नकारात्मक भाव कभी न लिखें। मान लीजिए आप चाहते हैं कि आपका क्रोध समाप्त हो जाए तो आप अगर यूं लिखेंगे कि अब मुझे क्रोध नहीं आता, तो आप क्रोध को ही दोहरा रहे हैं। तब इसके विपरीत शांत व्यवहार, निष्प्रतिक्रिया का भाव तो आप पैदा ही नहीं कर रहे है। जब आप क्रोध कहेंगे तो क्रोध को ही कल्पना में लाएंगे क्योंकि अवचेतन मन को इनमे फर्क करना नहीं आता की क्या ठीक है और क्या गलत उसका सिधांत है जो चीज बार बार दोहराई जा रही है वो आपके देनी है यदि क्रोध तो आपको और ज्यादा क्रोध मिलेगा और यदि  शांत व्यवहार या समताभाव को कल्पना में लाएंगे तो अवचेतन मन में शांत भाव की कल्पना को ही बार बार दोहराएगा और आप शांत होते चले जायेंगे

मस्तिष्क की शक्तियों का प्रयोग करने के आसान उपाय

मुझे लागत है की आप अवचेतन मन का उपयोग करना सिखा गए होंगे हो सकता है की आपको ये सफलता शुरु में समय लगे पर जब आप एक बार इसे कर लेंगे तो ये कुछ पलों में होने लगेगा अधिकतर मार्केटिंग कंपनी इन्ही फोर्मुले को उसे करती हैं और आपको प्रोग्राम करती है और आपको पता ही नहीं लग पता की हम उनके कहे अनुसार काम कर रहे हैं या उनका प्रोडक्ट ले रहे हैं. अवचेतन मन का उपयोग insurance कंपनी के ट्रेनर भी बहुत करते है वो आपको बताते है की आपको इस month का target कैसे पाना है तो आप अपने display borad पर अपना नाम topper में देखें और अपने मन में सोचें की (You achieve Targen OR You are Winner) और आपको ऑफिस आते जाते उठते बैठते इस पर नज़र डालनी है insurance की closing के बाद जो Meet होगी आप उसमे winner है इस तरह आप वो target winner बनते हैं और आपको पता ही नहीं लगता की ये कैसे हो गया ये है आपके अवचेतन मन का उपयोग

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