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अंजीर के औषधीय एवं आयुर्वेदिक गुण

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अंजीर के औषधीय एवं आयुर्वेदिक गुण

अंजीर एक मीठा, मुलायम, गूदेदार तथा स्वास्थ्यवर्द्धक फल है। इसका गूदा मीठा होता है और बीज छोटे होते हैं। इसके कई आकार और रंग होते हैं। इसमें नमी, प्रोटीन, चिकनाई और कार्बोहाइड्रेट् तत्त्व होते हैं। सूखी अंजीर में पोषक तत्व अधिक होते हैं। इसमें सबसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व शर्करा है। अंजीर में अनेक रोगनाशक गुण होते हैं, जो, बीमारी से आयी कमजोरी को दूर कर, सामान्य स्वास्थ्य प्राप्त करने में सहायता करते हैं  यह, शारीरिक और मानसिक तनाव दूर कर, शरीर को स्फूर्ति और शक्ति प्रदान करता है। अंजीर को दूध में उबाल कर पीने से शारीरिक शक्ति में वृद्धि होती है। यह एक उत्तम शक्तिवर्द्धक औषधि है। जिनके होंठ फूल जाते हैं और जीभ पर छाले हो जाते हैं, उन्हें Anjeer के सेवन से लाभ होता है। यह हृदय रोगों में उपयोगी है और नाक से खून गिरना बंद करता है। सूखे अंजीर में मधुमेह और श्वास रोगनाशक गुण हैं। अंजीर सब सूखे मेवों से अधिक लाभदायक है। यह चेहरे की कांति बढ़ाता है, बलगम को पिघला कर बाहर करता है।

विभिन्न रोगों में अंजीर से उपचार:

    • कब्ज:- 3 से 4 पके अंजीर दूध में उबालकर रात्रि में सोने से पूर्व खाएं और ऊपर से उसी दूध का सेवन करें। इससे कब्ज और बवासीर में लाभ होता है।
    • माजून अंजीर 10 ग्राम को सोने से पहले लेने से कब्ज़ में लाभ होता है।
    • अंजीर 5 से 6 पीस को 250 मिलीलीटर पानी में उबाल लें, पानी को छानकर पीने से कब्ज (कोष्ठबद्धता) में राहत मिलती है।
    • अंजीर को रात को पानी में भिगोकर सुबह चबाकर खाकर ऊपर से पानी पीने पेट साफ हो जाता है।
    • अंजीर के 4 दाने रात को सोते समय पानी में डालकर रख दें। सुबह उन दानों को थोड़ा सा मसलकर जल पीने से अस्थमा में बहुत लाभ मिलता है तथा इससे कब्ज भी नष्ट हो जाती है।
    • स्थायी रूप से रहने वाली कब्ज अंजीर खाते रहने से दूर हो जाती है। अंजीर के 2 से 4 फल खाने से दस्त आते हैं। खाते समय ध्यान रहे कि इसमें से निकलने वाला दूध त्वचा पर न लगने पाये क्योंकि यह दूध जलन और चेचक पैदा कर सकता है।
    • खाना खाते समय Anjeer के साथ शहद का प्रयोग करने से कब्ज की शिकायत नहीं रहती है।”
    • दमा :- दमा जिसमें कफ (बलगम) निकलता हो उसमें Anjeer खाना लाभकारी है। इससे कफ बाहर आ जाता है तथा रोगी को शीघ्र ही आराम भी मिलता है।
    • प्रतिदिन थोड़े-थोड़े Anjeer खाने से पुरानी कब्जियत में मल साफ और नियमित आता है। 2 से 4 सूखे अंजीर सुबह-शाम दूध में गर्म करके खाने से कफ की मात्रा घटती है, शरीर में नई शक्ति आती है और दमा (अस्थमा) रोग मिटता है।”
    • प्यास की अधिकता :- बार-बार प्यास लगने पर अंजीर का सेवन करें।
    • मुंह के छाले :- Anjeer का रस मुंह के छालों पर लगाने से आराम मिलता है।
    • प्रदर रोग :-Anjeer का रस 2 चम्मच शहद के साथ प्रतिदिन सेवन करने से दोनों प्रकार के प्रदर रोग नष्ट हो जाते हैं।
    • दांतों का दर्द :- *अंजीर का दूध रुई में भिगोकर दुखते दांत पर रखकर दबाएं।
    • Anjeer के पौधे से दूध निकालकर उस दूध में रुई भिगोकर सड़ने वाले दांतों के नीचे रखने से दांतों के कीड़े नष्ट होते हैं तथा दांतों का दर्द मिट जाता है।”
    • पेशाब का अधिक आना :- 3-4 Anjeer खाकर, 10 ग्राम काले तिल चबाने से यह कष्ट दूर होता है।
    • त्वचा के विभिन्न रोग :- *कच्चे Anjeer का दूध समस्त त्वचा सम्बंधी रोगों में लगाना लाभदायक होता है।
    • Anjeer का दूध लगाने से दिनाय (खुजली युक्त फुंसी) और दाद मिट जाते हैं। बादाम और छुहारे के साथ अंजीर को खाने से दाद, दिनाय (खुजली युक्त फुंसी) और चमड़ी के सारे रोग ठीक हो जाते है।”
    • दुर्बलता (कमजोरी) :- पके Anjeer को बराबर की मात्रा में सौंफ के साथ चबा-चबाकर सेवन करें। इसका सेवन 40 दिनों तक नियमित करने से शारीरिक दुर्बलता दूर हो जाती है।
    • Anjeer को दूध में उबालकर-उबाला हुआ अंजीर खाकर वही दूध पीने से शक्ति में वृद्धि होती है तथा खून भी बढ़ता है।
    • रक्तवृद्धि और शुद्धि हेतु :- 10 मुनक्के और 5 अंजीर 200 मिलीलीटर दूध में उबालकर खा लें। फिर ऊपर से उसी दूध का सेवन करें। इससे रक्तविकार दूर हो जाता है।
    • पेचिश और दस्त :- Anjeer का काढ़ा 3 बार पिलाएं।
    • ताकत को बढ़ाने वाला :- सूखे अंजीर के टुकड़े और छिली हुई बादाम गर्म पानी में उबालें। इसे सुखाकर इसमें दानेदार शक्कर, पिसी इलायची, केसर, चिरौंजी, पिस्ता और बादाम बराबर मात्रा में मिलाकर 8 दिन तक गाय के घी में पड़ा रहने दें। बाद में रोजाना सुबह 20 ग्राम तक सेवन करें। छोटे बालकों की शक्तिक्षीण के लिए यह औषधि बड़ी हितकारी है।
    • जीभ की सूजन :- सूखे अंजीर का काढ़ा बनाकर उसका लेप करने से गले और जीभ की सूजन पर लाभ होता है।
    • पुल्टिश :- ताजे अंजीर कूटकर, फोड़े आदि पर बांधने से शीघ्र आराम होता है।
    • दस्त साफ लाने के लिए :- दो सूखे अंजीर सोने से पहले खाकर ऊपर से पानी पीना चाहिए। इससे सुबह साफ दस्त होता है।
    • क्षय यानी टी.बी के रोग :- इस रोग में अंजीर खाना चाहिए। अंजीर से शरीर में खून बढ़ता है। अंजीर की जड़ और डालियों की छाल का उपयोग औषधि के रूप में होता है। खाने के लिए 2 से 4 अंजीर का प्रयोग कर सकते हैं।
    • फोड़े-फुंसी :- अंजीर की पुल्टिस बनाकर फोड़ों पर बांधने से यह फोड़ों को पकाती है।
    • गिल्टी :- अंजीर को चटनी की तरह पीसकर गर्म करके पुल्टिस बनाएं। 2-2 घंटे के अन्तराल से इस प्रकार नई पुल्टिश बनाकर बांधने से `बद´ की वेदना भी शांत होती है एवं गिल्टी जल्दी पक जाती है।
    • सफेद कुष्ठ (सफेद दाग) :- अंजीर के पेड़ की छाल को पानी के साथ पीस लें, फिर उसमें 4 गुना घी डालकर गर्म करें। इसे हरताल की भस्म के साथ सेवन करने से श्वेत कुष्ठ मिटता है।
    • अंजीर के कच्चे फलों से दूध निकालकर सफेद दागों पर लगातार 4 महीने तक लगाने से यह दाग मिट जाते हैं।
    • अंजीर के पत्तों का रस श्वेत कुष्ठ (सफेद दाग) पर सुबह और शाम को लगाने से लाभ होता है।
    • अंजीर को घिसकर नींबू के रस में मिलाकर सफेद दाग पर लगाने से लाभ होता है।”
    • गले के भीतर की सूजन :- सूखे अंजीर को पानी में उबालकर लेप करने से गले के भीतर की सूजन मिटती है।
    • श्वासरोग :- अंजीर और गोरख इमली (जंगल जलेबी) 5-5 ग्राम एकत्रकर प्रतिदिन सुबह को सेवन करने से हृदयावरोध (दिल की धड़कन का अवरोध) तथा श्वासरोग का कष्ट दूर होता है।
    • शरीर की गर्मी :- पका हुआ Anjeer लेकर, छीलकर उसके आमने-सामने दो चीरे लगाएं। इन चीरों में शक्कर भरकर रात को ओस में रख दें। इस प्रकार के अंजीर को 15 दिनों तक रोज सुबह खाने से शरीर की गर्मी निकल जाती है और रक्तवृद्धि होती है।
    • जुकाम :- पानी में 5 Anjeer को डालकर उबाल लें और इसे छानकर इस पानी को गर्म-गर्म सुबह और शाम को पीने से जुकाम में लाभ होता है।
    • फेफड़ों के रोग :- फेफड़ों के रोगों में पांच Anjeer एक गिलास पानी में उबालकर छानकर सुबह-शाम पीना चाहिए।
    • मसूढ़ों से खून का आना :- Anjeer को पानी में उबालकर इस पानी से रोजाना दो बार कुल्ला करें। इससे मसूढ़ों से आने वाला खून बंद हो जाता है तथा मुंह से दुर्गन्ध आना बंद हो जाती है।
    • तिल्ली (प्लीहा) के रोग में :- Anjeer 20 ग्राम को सिरके में डुबोकर सुबह और शाम रोजाना खाने से तिल्ली ठीक हो जाती है।
    • खांसी :- Anjeer का सेवन करने से सूखी खांसी दूर हो जाती है। अंजीर पुरानी खांसी वाले रोगी को लाभ पहुंचाता है क्योंकि यह बलगम को पतला करके बाहर निकालता रहता है।
    • Anjeer के फलों को पुदीने के साथ खाने से सीने पर जमा हुआ कफ धीरे-धीरे निकल जाएगा।
    • पके Anjeer का काढ़ा पीने से खांसी दूर हो जाती है।
    • गुदा चिरना :- सूखा Anjeer 350 ग्राम, पीपल का फल 170 ग्राम, निशोथ 87.5 ग्राम, सौंफ 87.5 ग्राम, कुटकी 87.5 ग्राम और पुनर्नवा 87.5 ग्राम। इन सब को मिलाकर कूट लें और कूटे हुए मिश्रण के कुल वजन का 3 गुने पानी के साथ उबालें। एक चौथाई पानी बच जाने पर इसमें 720 ग्राम चीनी डालकर शर्बत बना लें। यह शर्बत 1 से 2 चम्मच प्रतिदिन सुबह-शाम पीयें।
    • बवासीर (अर्श) :- सूखे Anjeer के 3-4 दाने को शाम के समय जल में डालकर रख दें। सुबह उन अंजीरों को मसलकर प्रतिदिन सुबह खाली पेट खाने से अर्श (बवासीर) रोग दूर होता है।
    • Anjeer को गुलकन्द के साथ रोज सुबह खाली पेट खाने से शौच के समय पैखाना (मल) आसानी से होता है।
    • कमर दर्द :- अंजीर की छाल, सोंठ, धनियां सब बराबर लें और कूटकर रात को पानी में भिगो दें। सुबह इसके बचे रस को छानकर पिला दें। इससे कमर दर्द में लाभ होता है।
    • आंवयुक्त पेचिश :- पेचिश तथा आवंयुक्त दस्तों में Anjeer का काढ़ा बनाकर पीने से रोगी को लाभ होता है।
    • अग्निमान्द्य (अपच) होने पर :- Anjeer को सिरके में भिगोकर खाने से भूख न लगना और अफारा दूर हो जाता है।
    • प्रसव के समय की पीड़ा :- प्रसव के समय में 15-20 दिन तक रोज दो Anjeer दूध के साथ खाने से लाभ होता है।
    • बच्चों का यकृत (जिगर) बढ़ना :- 4-5 अंजीर, गन्ने के रस के सिरके में गलने के लिए डाल दें। 4-5 दिन बाद उनको निकालकर 1 अंजीर सुबह-शाम बच्चे को देने से यकृत रोग की बीमारी से आराम मिलता है।
    • फोड़ा (सिर का फोड़ा) :- फोड़ों और उसकी गांठों पर सूखे अंजीर या हरे अंजीर को पीसकर पानी में औटाकर गुनगुना करके लगाने से फोड़ों की सूजन और फोड़े ठीक हो जाते हैं।
    • दाद :- Anjeer का दूध लगाने से दाद ठीक हो जाता है।
    • सिर का दर्द :- सिरके या पानी में Anjeer के पेड़ की छाल की भस्म मिलाकर सिर पर लेप करने से सिर का दर्द ठीक हो जाता है।
    • सर्दी (जाड़ा) अधिक लगना :- लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग की मात्रा में Anjeer को खिलाने से सर्दी या शीत के कारण होने वाले हृदय और दिमाग के रोगों में बहुत ज्यादा फायदा मिलता है।
    • खून और वीर्यवद्धक :- सूखे Anjeer के टुकड़ों एवं बादाम के गर्भ को गर्म पानी में भिगोकर रख दें फिर ऊपर से छिलके निकालकर सुखा दें। उसमें मिश्री, इलायची के दानों की बुकनी, केसर, चिरौंजी, पिस्ते और बलदाने कूटकर डालें और गाय के घी में 8 दिन तक भिगोकर रखें। यह मिश्रण प्रतिदिन लगभग 20 ग्राम की मात्रा में खाने से कमजोर शक्ति वालों के खून और वीर्य में वृद्धि होती है।
    • एक सूखा Anjeer और 5-10 बादाम को दूध में डालकर उबालें। इसमें थोड़ी चीनी डालकर प्रतिदिन सुबह पीने से खून साफ होता है, गर्मी शांत होती है, पेट साफ होता है, कब्ज मिटती है और शरीर बलवान बनता है।
  • प्रतिदिन सेवन करने से शरीर शक्तिशाली होता है, और मनुष्य के संभोग करने की क्षमता भी बढ़ती है।
  • मुंहासे :- कच्चे Anjeer का दूध मुंहासों पर 3 बार लगाएं।

नोट :- यह गर्म प्रकृति का होता है।  इसका  का अधिक सेवन यकृत (जिगर) और आमाशय के लिए हानिकारक हो सकता है। अंजीर के हानिकारक प्रभाव को नष्ट करने के लिए बादाम का उपयोग किया जाता है। एक दिन में अंजीर की पांच दाने तक ले सकते हैं।

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